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भजनलाल सरकार में IAS अधिकारियों का टोटा, जुगाड़ से चल रही ब्यूरोक्रेसी की गाड़ी, जानें क्या हैं ताजा हालात

जयपुर. राजस्थान में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों की कमी के चलते मुख्य सचिव सुधांश पंत सहित 35 अफसरों को अतिरिक्त भार संभालना पड़ रहा है. राजस्थान में आईएएस के स्वीकृत पद संख्या 313 हैं. जबकि वर्तमान में यहां 253 आईएएस अधिकारी ही मौजूद हैं. उनमें से भी 19 अधिकारी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. एक अधिकारी इंटर स्टेट डेपुटेशन पर हैं और एक इंट्रा स्टेट डेपुटेशन. यानि प्रदेश की योजनाओं को लागू करने का जिम्मा 228 आईएएस अधिकारियों के ऊपर है. राजस्थान में फिलहाल करीब 112 आईएएस अधिकारियों की कमी चल रही है.

राजस्थान की नई भजनलाल सरकार को सूबे की जनता से किए गए चुनावी वादों को पूरा करना है. वहीं लोकसभा चुनाव के मद्देनजर योजनाओं पर फास्ट एक्शन मोड में काम करना है. लेकिन अधिकारियों की कमी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है. राजस्थान में ब्यूरोक्रेसी को गति देने के लिए मुख्य सचिव सुधांश पंत लगातार औचक निरीक्षण कर रहे हैं. इससे कर्मचारियों और अधिकारियों में वक्त की पाबंदी और त्वरित काम होने के मामले में तेजी आई है. लेकिन अधिकारियों की कमी की वजह से अन्य अधिकारियों पर काम का बोझ बढ़ रहा है.

पिछले दिनों जारी की गई करीब करीब हर तबादला लिस्ट में अधिकारियों के अतिरिक्त कार्यभार में भी इजाफा किया गया है. इसका असर सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग, समय पर पूरा करने और बेहतर प्रदर्शन पर भी पड़ रहा है. हालात ये हैं कि एक-एक आईएएस के पास कई विभागों का चार्ज है. कई अफसरों को एक से अधिक पद भी संभालने पड़ रहे हैं.

राजस्थान में एक करोड़ की आबादी पर आईएएस के 39 पद आवंटित हैं. इसके विपरीत हरियाणा में एक करोड़ लोगों पर 77 आईएएस के पद आवंटित हैं. पंजाब में भी 77 पद आवंटित हैं. मध्यप्रदेश में 52 और तमिलनाडु में 49 पद आवंटित है. मुख्य सचिव सुधांश पंत के मुताबिक राजस्थान में क्षेत्रफल और आबादी के हिसाब से 365 आईएएस अफसरों का कैडर निर्धारित होना चाहिए.

देश के जिन तीन राज्यों में तय काडर से 100 पदों से ज्यादा अधिकारियों की कमी चल रही है. उनमें राजस्थान तीसरे स्थान पर है. उत्तर प्रदेश में 208, बिहार में 123 और राजस्थान में 112 अफसरों की कमी मानी जा रही है. प्रदेश में नये जिलों के गठन के बाद आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियां और मांग बढ़ गई हैं. इससे अफसरों की कमी और खलने लगी है.

हालांकि बीते साल कार्मिक विभाग की ओर से केंद्र के समक्ष अपना पक्ष रखा गया था. लेकिन केंद्र से उस समय मदद नहीं मिली थी. अब सरकार बदलने के बाद उम्मीद है इसको लेकर कोई सकारात्मक खबर सामने आए. प्रदेश में मौजूदा हालात के मुकाबले नये मुख्य सचिव ने अपनी कार्यशैली से काम में गति लाने की कोशिश की है.

उन्होंने ऐसे अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार देने पर फोकस किया है जो ज्यादा काम होने के बावजूद उसे समय पर डिलीवर करने को तैयार हैं. खुद मुख्य सचिव लगातार औचक निरीक्षण कर रहे हैं ताकि जनता से किये गए सरकार के वादों को पूरा किया जा सके. केंद्र और राज्य की सभी स्कीमों में बेहतर प्रदर्शन के साथ प्रदेश में आमजन को गुड गवर्नेंस का अच्छा उदाहरण पेश किया जा सके.

Tags: Bhajan Lal Sharma, Jaipur news, Rajasthan news

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