* आष्टा | राधा-कृष्ण मंदिर के विवाद में आष्टा का पूरा सनातन समाज और तहसीलदार हुए आमने सामने*
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल *
आष्टा शहर के अति प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर, नजरगंज में चल रहे मरम्मत कार्य को रुकवाने पहुंचे तहसीलदार रामलाल पगारे के खिलाफ सनातन समाज ने मोर्चा खोल दिया है।
सनातन समाज एवं बलाई समाज के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शहर के बीचों-बीच स्थित भव्य और ऐतिहासिक राधा-कृष्ण मंदिर में बीते दिनों मरम्मत का कार्य चल रहा था।
इसी दौरान आकस्मिक रूप से तहसीलदार आष्टा रामलाल पगारे मंदिर पहुंचे और निर्माण कार्य को रुकवाने का प्रयास किया।
मौके पर मौजूद मंदिर समिति और बलाई समाज के लोगों का आरोप है कि तहसीलदार ने न केवल कार्य रोका बल्कि उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया।
बलाई समाज और संपूर्ण सनातन समाज का कहना है कि तहसीलदार रामलाल पगारे की यह पहली ऐसी कार्यवाही नहीं है।
इससे पहले भी वे जगन्नाथ मंदिर, बासबेड़ा में धार्मिक कार्यों में बाधा उत्पन्न कर चुके हैं।
समाज का आरोप है कि तहसीलदार की कार्यशैली शहर के हित में नहीं है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।
ज्ञापन के माध्यम से यह भी मांग की गई है कि तहसीलदार यह स्पष्ट करें कि वे किसके निर्देश पर मंदिर का कार्य रुकवाने पहुंचे थे।
यदि कोई शिकायतकर्ता नहीं है, तो तहसीलदार रामलाल पगारे के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए। इस पूरे मामले में हमने जब आष्टा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व नितिन कुमार टाले से बात की तो उन्होंने कहा की

मामला हमारे संज्ञान में आया है। समाज द्वारा दिए गए ज्ञापन की जांच की जाएगी। मैंने अभी तहसीलदार का पक्ष नहीं जाना हे
जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।”
साथ ही हमने बलाई समाज के प्रमुख बाबूलाल मालवीय से मामले को समझना चाहा तो उन्होंने कहा कि यह मंदिर आष्टा की आस्था का केंद्र है।

बिना किसी लिखित आदेश और शिकायत के तहसीलदार द्वारा कार्य रुकवाना पूरी तरह अनुचित है।
समाज यह जानना चाहता है कि शिकायतकर्ता कौन है।
अगर कोई शिकायत नहीं है तो तहसीलदार पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
फिलहाल सनातन समाज तहसीलदार की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है।







