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प्रधान संपादक:- श्री दिनेश शर्मा
मुख्य संपादक:- श्री पीयूष शर्मा

आष्टा | नलों में ज़हर! दूषित पानी से जनता की सेहत से खुला खिलवाड़, नपा बे परवाह । आष्टा शहर में इन दिनों नलों से पानी नहीं, बीमारियाँ बह रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की आँखों पर जैसे लापरवाही की पट्टी बंधी हुई है।

*आष्टा | नलों में ज़हर! दूषित पानी से जनता की सेहत से खुला खिलवाड़, नपा बे परवाह ।

आष्टा शहर में इन दिनों नलों से पानी नहीं, बीमारियाँ बह रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की आँखों पर जैसे लापरवाही की पट्टी बंधी हुई है।

 

*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल *

हम बात कर रहे हैं आष्टा नगरपालिका की, जहाँ जनप्रतिनिधि और अधिकारी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से मुँह मोड़कर आम नागरिकों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
नगरपालिका अध्यक्ष, जिन पर जनता ने भरोसा जताया था, वे आज तीर्थ यात्राओं की आड़ में प्रशासनिक विफलताओं को ढकने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि शहर के कई वार्डों—विशेषकर वार्ड क्रमांक 13 और 14—में नलों से एकदम गंदा, बदबूदार और संदिग्ध पानी सप्लाई किया जा रहा है।

*वार्ड 13 में हालात भयावह*

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बीते कई दिनों से वार्ड क्रमांक 13 में जो पानी नलों से आ रहा है, वह पीने की तो बात छोड़िए, नहाने में भी खुजली और जलन पैदा कर रहा है।
वार्डवासी मजबूरी में अन्य स्रोतों से पानी लाने को विवश हैं। सवाल यह है कि—
क्या टैक्स देने वाली जनता को यह सज़ा मिलनी चाहिए?

*इंदौर की दर्दनाक घटना के बाद भी सबक नहीं ले रही आष्टा नगरपालिका*

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हाल ही में दूषित पानी के कारण इंदौर जैसे शहर में दर्जनों लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया, लेकिन आष्टा नगरपालिका पर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता।
यह लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित अपराध की श्रेणी में आती है, क्योंकि जिम्मेदार सब कुछ जानते हुए भी चुप हैं।
वीडियो वायरल, फिर भी नपा मौन
शहर के जागरूक नागरिक लगातार नालियों और गंदे नालों का पानी किस तरह नदी में मिल रहा है, इसके वीडियो वायरल कर रहे हैं।
नगरपालिका को टैग कर चेताया भी जा रहा है, लेकिन—
न जनप्रतिनिधि जाग रहे हैं
न अधिकारी एटीट्यूड छोड़ने को तैयार हैं
जनता का दुर्भाग्य यह है कि सुनने वाला कोई नहीं।

*जलशोधन संयंत्र की जल शोधन प्रक्रिया सिर्फ कागज़ों में?*

नगरपालिका दावा करती है कि वह जलशोधन संयंत्र से फिल्टर किया हुआ पानी सप्लाई कर रही है, लेकिन नलों से आ रहा पानी खुद इस दावे की पोल खोल देता है।
क्या इस्तेमाल हो रही एलम सही गुणवत्ता की है?
ब्लीचिंग पाउडर मानकों के अनुसार डाला जा रहा है या नहीं? अगर सभी वस्तुएं मानक व अनुसार उच्च गुणवत्ता वाली उपयोग हो रही हे तो नगरपालिका द्वारा समय समय पर
जल परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
इन सवालों के जवाब नपा के पास नहीं हैं।
आख़िर नगरपालिका की जिम्मेदारी क्या है?
हर हाल में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना
नियमित रूप से पानी की लैब जाँच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करना
जलशोधन संयंत्र में प्रयुक्त रसायनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना
नालियों व गंदे जल का नदी में मिलना तत्काल रोकना
दूषित पानी की शिकायत पर तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करना
लापरवाह कर्मचारी ओर अधिकारी पर कार्रवाई तय करना

*बड़ा सवाल*–

क्या आष्टा नगरपालिका और उसके जिम्मेदार किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहे हैं?
या फिर जनता की सेहत की कोई कीमत ही नहीं बची है?
अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह मुद्दा सिर्फ लापरवाही नहीं, आपराधिक उदासीनता माना जाएगा।

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