*स्वच्छता के नाम पर ढोंग!*
*वार्ड 16 में गार्बेज पॉइंट हटाया, सवालों के कचरे में फंसी नगर पालिका*
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*

आष्टा नगर पालिका द्वारा स्वच्छता अभियान के नाम पर एक बार फिर खानापूर्ति और दिखावटी कार्रवाई की गई।
वार्ड क्रमांक 16 में बिजली घर के पास बने गार्बेज पॉइंट को हटाकर नगर पालिका अध्यक्ष हेम कुंवर रायसिंह मेवाड़ा, सीएमओ विनोद कुमार प्रजापति और वार्ड के जनप्रतिनिधियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने का दावा तो कर दिया, लेकिन जनता के सवालों का जवाब देना जरूरी नहीं समझा।
*महीनों से गंदगी, जनप्रतिनिधि मौन क्यों रहे?
स्थानीय रहवासियों के अनुसार उक्त स्थान पर लंबे समय से कचरा जमा था।
बदबू, गंदगी और संक्रमण का खतरा बना हुआ था, लेकिन वार्ड के प्रमुख जनप्रतिनिधि वार्ड पार्षद
नगर पालिका अध्यक्ष और संबंधित अधिकारी आदि सभी ने आख़िर अब तक क्यो चुप्पी साधे रखी?
अब जब मामला सामने आया तो आनन-फानन में अभियान चलाकर अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
*₹500 जुर्माने की चेतावनी, अब तक क्यों नहीं वसूला?*
नगर पालिका ने अब यह एलान किया है कि आगे से कचरा फेंकने पर ₹500 का जुर्माना लगाया जाएगा और सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जावेगी,लेकिन सवाल यह है कि क्या कानून और नियम सिर्फ भविष्य के लिए होते हैं?
जो लोग अब तक खुलेआम कचरा फेंकते रहे, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
*सफाई मित्रों के कंधों पर अफसरों की नाकामी*
गार्बेज पॉइंट हटाने का श्रेय सफाई मित्रों को दिया जा रहा है और उनका सम्मान भी किया गया। जो की सराहनीय हे लेकिन हकीकत यह है कि
पालिका के अफसरों और जनप्रतिनिधियों की नाकामी का बोझ हमेशा सफाई मित्र ही उठाते हैं।
जब व्यवस्था बिगड़ती है, तब सम्मान देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
*आंगनवाड़ी और नागरिक आगे, जनप्रतिनिधि पीछे*
इस पूरी कवायद में आंगनवाड़ी केंद्र और स्थानीय नागरिकों की सक्रियता साफ दिखाई दी।
लोगों का कहना है कि
यदि जनता और आंगनवाड़ी कर्मी आगे न आते, तो शायद नगर पालिका को यह गंदगी आज भी नजर नहीं आती।
*स्वच्छ शहर के दावे खोखले*
नगर पालिका द्वारा इसे स्वच्छ शहर की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि— आज भी नगरपालिका के पास कोई स्थायी कचरा प्रबंधन नीति नहीं हे
शहर में जगह जगह पड़े रहने वाले कचरे पर बाद में ही निगाहे क्यो जा रही ही शहर की सफ़ाई की हकीकत देखना हो तो शहर का वार्ड 15 ही काफ़ी हे । हालात देखकर इर आनन फ़ानन में किए जाने वाले फ़ोटो सेसन की की जा रही कार्रवाई जनता के दबाव में, हो तो रही ही लेकिन जिम्मेदारों की शहर के प्रति जिम्मेदारी अब भी शून्य ही दिखाई दे रही हैं । इस कार्यक्रम को देखकर अब जनता यह जानना चाहती है कि
क्या जनप्रतिनिधि सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित रहेंगे, या वास्तव में अपने वार्ड की जिम्मेदारी लेंगे?







