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आष्टा में “काला तालाब” पर घमासान! निजीकरण के खिलाफ फूटा जनआक्रोश, पार्षद समेत नागरिकों ने रुकवाया काम ।

  • आष्टा में “काला तालाब” पर घमासान! निजीकरण के खिलाफ फूटा जनआक्रोश, पार्षद समेत नागरिकों ने रुकवाया काम ।

दिनेश शर्मा आष्टा हलचल

आष्टा। नगर पालिका की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वार्ड क्रमांक 16 स्थित पुष्प विद्यालय के सामने वर्षों पुराने सार्वजनिक “काला तालाब पार्क” को कथित रूप से 30 वर्षों के लिए लीज पर देने के विरोध में अब जनता खुलकर मैदान में उतर आई है।

जिस पार्क में कभी बच्चों की किलकारियां, महिलाओं की गतिविधियां, बुजुर्गों का योग-व्यायाम और आमजन की बैठकी हुआ करती थी, वहां अब निजीकरण की आड़ में पेड़-पौधों की कटाई, खुदाई और कब्जे जैसी स्थिति बनने के आरोप लग रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगरपालिका ने जनता की खुली जमीन को व्यक्ति विशेष के हित में सौंप दिया, जबकि यह पार्क वर्षों से सार्वजनिक उपयोग की भूमि रहा है। पार्क में चल रहे निर्माण कार्यों के तहत बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए हैं और हरियाली को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है।

“जनता का पार्क या निजी साम्राज्य?”

 

क्षेत्रीय पार्षद रवि शर्मा के नेतृत्व में आष्टा युवा संगठन संस्था अध्यक्ष आनंद गोस्वामी, हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष भूरू मुकाती, सकल समाज अध्यक्ष नरेंद्र कुशवाह, पूर्व पार्षद कालू भट्ट, विशाल चौरसिया सहित बड़ी संख्या में नागरिकों ने निरस्त करने की मांग की ।
आज आक्रोशित शहर के जागरूक युवाओ ने नगरपालिका के खिलाफ खुलकर विरोध जड़ते हुए मोर्चा खोल दिया।
आक्रोशित नागरिकों ने तहसीलदार श्री रामलाल पगारे को ज्ञापन सौंपकर पार्क में चल रहे कार्य को तत्काल बंद करने और लीज निरस्त करने की मांग की ।
कागजों में हुए इस भारी भरकम खेल को जनता मानो समझ गई की आख़िर किस तरह से कीड़ी को लाभ पहुचाते हुए ज़िम्मेदार भी अपना स्वार्थ साध रहे हे।
अब शहर में सवाल उठ रहे हैं की आखिर सार्वजनिक पार्क को निजी हाथों में देने की जरूरत क्यों पड़ी?
क्या जनहित से ऊपर निजी हितों को तरजीह दी जा रही है?
क्या लीज प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चला?
जनता की खुली जमीन पर फैसले लेते समय स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की राय क्यों नहीं ली गई? इस तरह जे उपज रहे गंभीर सवालो के साथ क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि पार्क भूमि की लीज निरस्त नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।


ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से जगदीश कुशवाह, पंकज बैरागी, रमेश कुशवाह, दिनेश कुशवाह, शिवा कुशवाह, सुरेश मेवाड़ा, रोहित तोमर, राम कुशवाह, जितेश कुशवाह, बलराम कुशवाह, हरि कुशवाह, अशोक कुशवाह, सेवा राम कुशवाह, बंटी कुशवाह, डुग्गू कुशवाह, चुन्नू कुशवाह, गट्टू कुशवाह, अनिकेत कुशवाह, बाड़ू कुशवाह, मुन्नालाल कुशवाह, संजय कुशवाह, अमन कुशवाह, बाल मुकंद कुशवाह, खुशीलाल कुशवाह सहित अनेक नागरिक मौजूद रहे।

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