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*आष्टा पीपल्या कैलाश की शिवानी शर्मा बनी पुलिस*

आष्टा
सीहोर जिले के आष्टा तहसील के ग्राम पिपलिया कैलाश की बेटी शिवानी शर्मा पिता श्री रुपेश शर्मा ने मध्यप्रदेश पुलिस में चयनित होकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपने पहले ही अटेम्पट में अपनी पहली प्रतियोगी परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए जनरल कैटेगरी मेरिट में 16वीं रैंक हासिल की। खास बात यह है कि शिवानी ने मात्र 20 वर्ष की उम्र में सरकारी सेवा प्राप्त कर एक मिसाल पेश की है। वे अपने गांव और पूरे परिवार में पहली पुलिस सेवा में स्थान पाने वाली बनी है।

 


कठिन आर्थिक परिस्थितियां, पारिवारिक जिम्मेदारियां, मानसिक व शारीरिक चुनौतियां व तनाव—इन सबके बीच शिवानी ने अपना आत्मविश्वास बनाये रखा। उनके कुछ करके दिखाने की उनके सपने ने केवल डेढ़ महीने की जुनून भरी पढ़ाई और तीन महीने की कठोर शारीरिक तैयारी के दम पर उन्होंने लिखित परीक्षा में 75 और शारीरिक परीक्षा में 80 अंक प्राप्त कर कुल 155 अंक अर्जित किए। और 152.49 का मेरिट स्कोर किया।
इस संघर्ष के दौरान दिसंबर जनवरी फरवरी की कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और कई व्यक्तिगत समस्याएं भी सामने आईं, लेकिन शिवानी का भरोसा अपनी मेहनत और भगवान पर अटूट रहा। उनका मानना है कि मेहनत इंसान के हाथ में होती है, परिणाम ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए। लेकिन मेहनत इतनी करलेनी चाहिए की चाहे परिणाम बुरा आये या अच्छा लेकिन ये पछतावा नहीं रहना चाहिए की हमने मेहनत मे कोई कमी रखी।संतुष्टि होनी चाहिए की हमने पूरे दिल से मेहनत की।

इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता और दादी का संयुक्त त्याग समर्पण उनका हौसला बना। वे अपनी सफलता का श्रेय उनकी मां पवित्र शर्मा को देती है जो मां रोज़ाना लगभग 16 किमी ठंड में उन्हें सुबह शाम स्टेडियम लाती ले जाती, उनके खान-पान और शारीरिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा, यहां तक कि कई बार पैरों में सूजन और शारीरिक समस्याएँ होने के बावजूद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

उनके घरवालों ने उनका पूरा साथ दिया वहीं पिता ने हर परिस्थिति में उन पर विश्वास बनाए रखा।
उनके माता पिता के संघर्ष और समाज में सकारात्मक प्रभाव डालने के उनके सपने ने उनमें हार मान लेने का ख्याल भी नही आने दिया। जिससे शिवानी का मनोबल और मजबूत हुआ।
शारीरिक दक्षता परीक्षा में उनके ट्रेनर के प्रयासों और अपनी मेहनत से वे स्टेडियम की सबसे कमजोर खिलाड़ी से सबसे अच्छी धावक बनी।

शिवानी बताती हैं कि तैयारी के दौरान इन पांच महीनों में उन्होंने खुदको—अधिक अनुशासित, समर्पित और मानसिक रूप से मजबूत और जीवन के प्रति सकारात्मक बनाया। वे आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है।
वे बताती है कि वे चाहती है आगे भी वे इसी समर्पण और ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने और जन हित मे कार्य करें।
शिवानी शर्मा की यह सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उनकी कहानी उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं। वे कहती है खुद से नहीं हारोगे तो कोई तुम्हें नहीं हरा सकता।

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