आष्टा | आदर्श मंडी या अवैध हाट-बाज़ार? जिम्मेदारों की पो – बारह,मंडी जा रही गर्त में ।

आष्टा की कृषि उपज मंडी
की वस्तुस्थिति देखकर यह सवाल खुद-ब-खुद उठता है—
आख़िर इस मंडी को “आदर्श मंडी” का दर्ज़ा कैसे मिला? क्योंकि
ज़मीनी हकीकत तो इसके ठीक उलट तस्वीर पेश कर रही है। की यह कागजों में आर्दश बन कर रह गई आज के हालात देख कर आख़िर क्या कहे आदर्श मंडी या हाटवाड़ी? क्योंकि इस मंडी में नियम-कानून पूरी तरह से लापता हो गए हे ।

आज मंडी प्रांगण पूरी तरह हाटवाड़ी में तब्दील नज़र आ रहा है। नियम, कानून और कायदे मानो किसी अनजान किताब में दफ़्न हो गए हो। लायसेंस हो या न हो यहाँ कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता ।
नीलामी से पहले ही आवारा छूटभैय्या बड़ी संख्या में ट्रॉलियों और किसानों की उपज से भरे वाहनों पर जुगाड़ लगाते दिख जाते हैं—किसानों को गुमराह कर सौदे तय कर लिए जाते हैं।

बिना लाइसेंस बिंदास व्यापार कर रहे
मंडी प्रांगण में इन लोगों का आलम यह हे कि
बगैर लाइसेंस खुलेआम अवैध तरीकों को अपना कर व्यापार, कर रहे हे ओर जिम्मेदार प्रशासन तंत्र मोन रहकर तमाशबीन बना हुआ हे । बड़ी बात यह भी हे कि कई लोगों ने बैगर
लाइसेंस के नाम पर अवैध कब्ज़े मंडी परिसर में कर तख्त रखकर या अस्थायी टाट-पल्ली लगाकर पूरे दिन मनमाने तरीके से अपना अवैध धंधा कर रहे हे,और कई ऐसे हे जो नाम के लिए किसी एक लाइसेंस को बोर्ड टांग कर दर्जनों लोग व्यापार के नाम पर सरकार और किसानो से रोज छलावा कर हे । ओर सब कुछ बेखौफ चल रहा है।
इस अवैध कारोबार के चलते ईमानदार और नियमों से व्यापार करने वाले व्यापारियों का अब टिकना मानो मुश्किल सा हो गया है।
*राजस्व की खुली लूट, प्रशासन मौन*
इस गोरखधंधे से मंडी प्रशासन को जहाँ रोज़ाना भारी राजस्व नुकसान हो रहा है।वही आए दिन मंडी बदनामी का दंश भी झेल रही हैं ।
सूत्र बताते हैं कि दर्जनों तख्त कथित नामों पर दर्ज कर अवेध रूप से पूरे परिसर में रखे हुए ही जो की अतिक्रमण की श्रेणी में होकर रोजाना मंडी की सुचारू व्यवस्था को बाधित करते हे ।
हैरत होती है यह देखकर की लायरंसी व्यक्ति का कहीं कोई अता पता नहीं,और उस लायसेंस पर अनेकों लोग बिंदास होकर अपना काम कर रहे हैं ।
मंडी प्रशासन के असल जिम्मेदारों की अचूक सहमति से असल में दूसरे लोग धंधा चला रहे हैं और सुविधा शुल्क के रूप में जिम्मेदार अपनी जेब भर रहे हैं ।
*दो नंबर जावक गेट का खेल*
सूत्रों का दावा है कि इस मंडी में प्रशासन की लचरता और लालच के कारण बड़े स्तर पर जावक द्वार से यू आरडी माल निकल रहा हे,अब कैसे निकल रहा है यह तो ज़िम्मेदार ही जाने, पर इस अवैध कारोबार ने भी मंडी की सुचारू स्वस्थ व्यवस्था को बिगाड़ रखा हे।
यह अलग बात हे की इस अवैध कारोबार संचालन में जिम्मेदारों की खुलकर पो-बारह हो रही हे । कितना अच्छा खेल हे मंडी से किसानो का माल ख़रीद कर बिना आवश्यक काग़ज़ात के
जावक गेट पर सुविधा शुल्क चुकाओ और बेख़ौफ़ मंडी जे बाहर अन्यत्र मंडी ने किसान के नाम से बेच आओ। कोई रोकने टोकने वाला नहीं । आश्चर्य होता हे यह सारा अवैध खेल मंडी प्रशासन से छिपा हुआ नहीं, हे फिर भी निजी स्वार्थ के आगे सब नतमस्तक हो रहे हे ।
**तुलावटियों की ‘पो-बारह**’
मंडी में चल रहे अवैध व्यापार को अनुज्ञप्तिधारी तुलावटियों का भी अप्रत्यक्ष सहयोग भी मिल रहा है। क्योंकि एक तरफ रोजाना प्रांगण में मंडी प्रशासन की मोन सहमति से बड़ी मात्रा में उपजों का व्यापार आउट में होता हे जिसका कोई लेखा जोखा नहीं होता, ओर यही आउट का माल यूआरडी धंधा करने वालों की दुकानों पर तुलता हे ओर
तुलाई का काम आखिर तुलावटी ही करते हैं,
और इसके बदले मनमाना पारिश्रमिक तुलावतियों द्वारा वसूला जाता है।
हैरानी ये कि मंडी प्रशासन ईमानदार व्यापारियों पर नियम-कानून का डंडा चलाने में तो फुर्ती दिखाता है,लेकिन अवैध रूप से धंधा कर रहे इन व्यापारियों की ओर देखना तक मुनासिब नहीं समझता?
जबकि अभी हाल ही में कृषि उपज मंडियों के वरिष्ठलय मंडी बोर्ड के सयुक्त संचालक स्टॉक निरीक्षण करने आई थी नाम दिया की निरीक्षण औचक था ,पर जिस तरह से कार्यवाही अमल में लाई गई,उससे प्रतीत होता ही की भोपाल से ही निरीक्षण अमला दुकान चिह्नित कर चला था अब प्रश्न उठता ही की व्यक्तिगत दुकान की जानकारी आखिर किसने दी?
वेसे भी जब बोर्ड की बड़ी अधिकारी प्रांगण में आई तो उन्हें यह बेतरतीब अतिक्रमण नहीं दिखाई दिया? आश्चर्य होता हे, प्रांगण में व्याप्त अन्य अव्यवस्थाएं नजर नहीं आई, ?
जहाँ तक अवैध व्यापार पर और राजस्व हानि पर शिकंजा कसने का सवाल ही तो अभी हाल ही में बोर्ड जे प्रबंध संचालक ने कठोरतम कार्यवाही करते हुए अवैध व्यापार कर रहे कारोबारी से लाखो में वसूली कर वाहन आदि की राजसात की कार्यवाही कर सख्त निर्देश दिए ।किंतु शायद आष्टा मंडी में तो एमडी साहब के निर्देश का भी कोई असर दिखाई न्ही दे रहा ।
प्रबंध संचालक पुरुषोत्तम कुमार द्वारा अवैध व्यापार करने वालो पर सख्ती बरतते हुए जिस प्रकार से भारी शिकंजा कस दिया हे ओर नियम पारित कर दिया हे कि अवैध तरीकों से व्यापार कर रहे लोगो का माल जप्त कर राजसात की कार्यवाही की जावे । किंतु आष्टा मंडी में इस तरह की सख्ती इस लिए नहीं हो पर रही हे क्योंकि यह जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन ईमानदारी से नहीं कर रहे हे, सारी हकीकत देखकर सीधा सवाल उठता हे कि
क्या यह सिर्फ अव्यवस्था है या संगठित मिलीभगत?
अवैध तख्त, बिना लाइसेंस व्यापार । ओर जवाक गेट बिंदास चालू।
“आदर्श मंडी” के तमगे की वास्तविक कसौटी क्या यही है?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक आष्टा की कृषि उपज मंडी किसानों, ईमानदार व्यापारियों और सरकारी राजस्व—तीनों के लिए नुकसान का सौदा बनी रहेगी।
अब देखना ये है—प्रशासन जागेगा या हाटवाड़ी का खेल यूं ही चलता रहेगा







