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आष्टा *नए बस स्टैंड की कंपोजिट शराब दुकान बनी रोज़ाना हादसों की खुली दावत, प्रशासन मौन* ।

आष्टा
*नए बस स्टैंड की कंपोजिट शराब दुकान बनी रोज़ाना हादसों की खुली दावत, प्रशासन मौन* ।

*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*

आष्टा के नए बस स्टैंड पर शुरू हुई कंपोजिट शराब दुकान अब जनसुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। दुकान खुलने के बाद से ही बस स्टैंड परिसर और प्रवेश मार्ग पर दोनों तरफ नमकीन चखने के बेतरतीफ खड़े होने वाले ठेले, ओर दूसरी तरफ ऑटो और अन्य प्राइवेट वाहनो के साथ साथ दारू पीने–पिलाने वालों की भीड़, झगड़े, मारपीट और अव्यवस्था रोज़मर्रा का दृश्य बन चुकी है। जो कि रोजाना दुर्घटनाओं को आमंत्रण देते हे । हालात ऐसे हैं कि बस स्टैंड के मुहाने पर नशेड़ियों का जमावड़ा इस कदर जाम लगा देता है कि बसों और अन्य वाहनों का अंदर जाना किसी युद्ध से कम नहीं—है।

यह कोई छिपी हुई सच्चाई नहीं हे, स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी मौन दर्शक बने हुए हैं- न ही यातायात नियंत्रण, न ही दुकान के आसपास अनुशासन—किसी भी स्तर पर सुधार की कोशिश नज़र नहीं आती।
अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब इस शराब दुकान के आसपास होने वाले आपसी झगड़ों में कोई बड़ी अप्रिय घटना या गंभीर सड़क दुर्घटना घटित हो जाएगी। बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक व संवेदनशील स्थान पर यह स्थिति सीधे-सीधे यात्रियों, महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों की सुरक्षा से  बहुत बड़ा खिलवाड़ है।

*व्यापारी आक्रोशित, लिखित शिकायत की तैयारी*

शराब दुकान के आसपास के स्थानीय व्यापारी इस रोज़ाना की अव्यवस्था से बुरी तरह त्रस्त हैं। उनका कहना है कि नशेड़ियों की भीड़ से ग्राहक डर रहे हैं, व्यापार प्रभावित हो रहा है और सार्वजनिक शांति भंग हो रही है। व्यापारी संगठन जल्द ही जिला प्रशासन को लिखित शिकायत देकर इस कंपोजिट शराब दुकान को बस स्टैंड के मुहाने से हटाने की मांग करेंगे।

*कानूनी पहलू: प्रशासन की जिम्मेदारी कहाँ?*

मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत शराब विक्रय/उपभोग से सार्वजनिक शांति, यातायात और सुरक्षा प्रभावित होने पर लाइसेंस शर्तों में बदलाव/निलंबन संभव है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 268 (Public Nuisance) के अंतर्गत सार्वजनिक स्थान पर उपद्रव, बाधा या खतरा दंडनीय है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत सार्वजनिक मार्ग/प्रवेश को बाधित करना अपराध है; यातायात पुलिस को तत्काल कार्रवाई का अधिकार है।
नगर पालिका/प्रशासन को बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थल पर अतिक्रमण, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है—लापरवाही पर जवाबदेही तय होती है।
बस स्टैंड क्षेत्र में शराब दुकान का स्थानांतरण बहुत जरूरी हो गया हे,

*यातायात प्लान—*
प्रवेश मार्ग खाली, बैरिकेडिंग, यह सब पुलिस के कानूनी दायरे में हे, फिर भी
अब सवाल यह है—क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? या फिर समय रहते सख्त कदम उठाकर यात्रियों और शहर की शांति को सुरक्षित करेगा—।

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