*आष्टा में उबाल! व्यापारी महासंघ और राजपूत करणी सेना का विशाल प्रदर्शन — उपद्रवियों पर “बुलडोजर कार्रवाई” की मांग, प्रशासन के सख्त कदम की प्रतीक्षा।*
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*

आष्टा। शहर मंगलवार को पूरी तरह आक्रोश में था। हरदा से लौट रहे करणी सेना कार्यकर्ताओं पर अलीपुर चौराहे पर हुए हमले और वाहनों की तोड़फोड़ की घटना ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। व्यापारी महासंघ, राजपूत करणी सेना और सनातन समाज के आह्वान पर पूरा शहर दोपहर 2 बजे तक बंद रहा।

शहर की सड़कों पर हजारों लोग “बुलडोजर चलाओ” और “दोषियों को सजा दो” जैसे नारों के साथ उतर पड़े। सिविल अस्पताल चौराहे से निकला विशाल जुलूस पूरे बाजार क्षेत्र से होता हुआ तहसील कार्यालय पहुंचा, जहां एसडीएम नितिन टाले को ज्ञापन सौंपा गया।ज्ञापन की मुख्य मांगेंघटना के सभी आरोपियों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाए।घटनास्थल और आसपास के अवैध निर्माणों पर तुरंत बुलडोजर कार्रवाई हो।पत्थरबाजी में प्रयुक्त सामग्री और इसकी आपूर्ति के स्रोतों की गहन जांच हो।अलीपुर और आसपास के इलाके में लगातार बढ़ रही हिंसक घटनाओं पर स्थायी समाधान निकाला जाए।व्यापारी महासंघ के नेताओं ने कहा कि अलीपुर क्षेत्र में पहले भी सरकारी कर्मचारी से मारपीट और चाकूबाजी की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अब “अराजक तत्वों की मनमानी को सहन नहीं किया जाएगा।”करणी सेना का रुख सख्तराजपूत करणी सेना के प्रमुख अनुराग प्रताप सिंह राघव ने तीखा बयान देते हुए कहा,“चार गिरफ्तारियां सिर्फ दिखावा हैं। असली दोषी कौन हैं, प्रशासन को सूक्ष्म जांच कर कार्यवाही करना चाहिए।हिंसा की जड़ को उखाड़ने के बिना न्याय नहीं मिलेगा। पत्थर मारने वालों को पत्थर में मिला देना चाहिए।”उनका यह बयान भीड़ में गूंज उठा, और “बुलडोजर चलाओ” के नारे और तेज हो गए।प्रशासन का जवाबएसडीएम नितिन टाले ने बताया कि अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।“पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमों के तहत कठोर कार्रवाई होगी।”फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा है,
लेकिन आष्टा का माहौल बता रहा है — लोगों का भरोसा केवल कार्रवाई देखकर ही लौटेगा, वादों से नहीं।अब नजरें टिकी हैं कि प्रशासन क्या अगला कदम उठाता है — “सिर्फ बयान” या “जमीनी बुलडोजर एक्शन!”







