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आष्टा के युवा तहसीलदार राम पगारे की मानवता भरी पहल, बच्चों के चेहरों पर लौटी खिलखिलाहट*

*आष्टा के युवा तहसीलदार राम पगारे की मानवता भरी पहल, बच्चों के चेहरों पर लौटी खिलखिलाहट*
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*

आष्टा – प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ संवेदनशीलता का मेल जब होता है, तब परिणाम समाज के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। कुछ ऐसा ही उदाहरण आष्टा के युवा तहसीलदार राम पगारे ने पेश किया, जिन्होंने अपने मानवीय दृष्टिकोण और त्वरित कार्यशैली से भगवानपुर पदमसी के नन्हे-मुन्नों के जीवन में खुशियों की बहार लौटा दी।जानकारी के अनुसार तहसीलदार पगारे आंगनवाड़ी के लिए भूमि चिन्हांकन करने शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास तथा ग्राम पंचायत टीम के साथ भगवानपुर पदमसी पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शासकीय माध्यमिक शाला के बच्चों के खेल मैदान में वर्षों से पड़े एक जर्जर भवन के मलबे को देखा। बिना विलंब किए उन्होंने मौके पर ही सफाई, समतलीकरण और मैदान की मरम्मत के निर्देश दिए और निगरानी में कुछ ही घंटों में मैदान को फिर से जीवंत कर दिया।खेल मैदान तैयार होते ही बच्चों की खुशी देखते ही बनती थी। नन्हे चेहरे उत्साह से खिल उठे और उनकी हंसी ने पूरे स्कूल परिसर को गुंजित कर दिया। इस मानवीय पहल ने न केवल बच्चों के लिए सुरक्षित खेल का वातावरण बनाया, बल्कि शिक्षकों और ग्रामवासियों में भी प्रसन्नता का संचार किया।सफाई अभियान में सरपंच, सचिव, हल्का पटवारी शकुन परमार, कानूनगो सतीश बिरथरे सहित विद्यालय की प्रधानाध्यापक तृप्ति तिवारी, शिक्षिका सुलोचना ठाकुर, शिक्षक अजेंद्र सिंह यादव, ममता सोलंकी और संदीप ठाकुर ने सक्रिय सहयोग दिया। छात्राएँ स्नेहा, सुष्मिता, करिश्मा और संजना सहित अन्य विद्यार्थियों ने तहसीलदार पगारे के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयास से अब उन्हें एक स्वच्छ और सुरक्षित खेल मैदान मिला है।

तहसीलदार राम पगारे की यह पहल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि उनकी संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय क्षमता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता वास्तव में प्रशासनिक पद पर मानवता की मिसाल पेश करती है।

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