“VIT : पढ़ाई पर पहरा, पानी में ज़हर!लगभग ”“15000 बच्चों को पढ़ाने वाले इस विश्वविद्यालय का असली एजेंडा क्या है? ज्ञान या ‘गुप्त शासन’! विद्यार्थियों के हाथ में आईडी कार्ड से ज़्यादा डर और प्रबंधन के आदेश हैं। पढ़ाई किले के भीतर… निकालना मना, बोलना मना, सवाल करना मतलब मार्क्स कट। ऐसे नियम, जैसे शिक्षा नहीं, सेना की निगरानी हो।
जब गेट पर दो घंटे जिला स्वास्थ्य अधिकारी खड़े रह गए, उस वक्त प्रशासन सोच रहा था – शायद बीमारी भी पहचान पत्र के बिना भीतर नहीं आएगी! मज़ाक तो तब हुआ जब भोजन, ओर पानी में स्वास्थ्य की जगह पीलिया परोसा गया, 18 में से — चार सैंपल फेल , याने पानी नहीं जहर परोसा गया ,
सुंकठ के नाम पर दिखावा’, यही रहा हॉस्टल का स्वास्थ्य प्रबंधन।
नवंबर में पीलिया फैलता रहा, बच्चे बीमार होते रहे, पर प्रबंधन ‘औपचारिकता’ में ही व्यस्त रहा। दवा भी मिली “चलते-चलते”, रोकथाम का इंतज़ाम केवल नोटिस बोर्ड पर!
हद तो तब हुई, जब छात्रों की शिकायत पर ही उल्टा उन पर कार्रवाई — फाइन, धमकी, सोशल मीडिया पर आवाज़ उठाओ तो ‘डिस्रेस्पेक्ट’ के नाम पर मार्क्स काटना, ID ज़ब्त करना, परीक्षा से रोकना। बेचारा छात्र सोचता होगा – क्या पढ़ाई का मतलब सजा भुगतना है?
सरकार का नोटिस आया तो वीसी का जवाब – “हमने सिर्फ अनुशासन का पालन करवाया!” अब जब मंत्रालय ने सात दिन का समय दिया है, तो पूरा बोर्ड सांस रोके बैठा है। जवाब नहीं आया, तो प्रशासक लगेगा। शिक्षा की किलेबंदी में अब ताले लगाने की तैयारी है!
ऐसे विश्वविद्यालयों में शिक्षा कम, तानाशाही ज्यादा मिलती है। बच्चों का डर असल “सिलेबस” बन चुका है। लगता है, वीआईटी में पढ़ाई, पानी और पेट — तीनों पर खतरा है: प्रबंधन का डर, भोजन का ज़हर, और पानी का संकट!







