RNI NO MPHIN/2023/91045

प्रधान संपादक:- श्री दिनेश शर्मा
मुख्य संपादक:- श्री पीयूष शर्मा

आष्टा मंडी की बदहाली: अव्यवस्था के आगे जाम, किसान व व्यापारी दोनों परेशानआष्टा।

आष्टा मंडी की बदहाली: अव्यवस्था के आगे जाम, किसान व व्यापारी दोनों परेशानआष्टा।
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल

कभी दक्ष प्रबंधन और व्यवसायिक सुगमता के लिए चर्चित रही आष्टा कृषि उपज मंडी आज अपने ही परिसर में बदहाली और अफरातफरी का शिकार हो चुकी है। वर्षों तक रोजाना 30-40 हजार बोरी उपज की नीलामी क्षमता रखने वाली मंडी अब प्रशासनिक लापरवाही के कारण 20 हजार बोरी भी सहजता से नीलाम नहीं कर पा रही है।‌ जरा सी आवक बढ़ते ही मंडी परिसर के बाहर कन्नौद मार्ग, आवासीय क्षेत्र शांति नगर, मंडी के पीछे तक जाम की स्थिति बन जाती है और किसान-व्यापारी घंटों परेशान होते हैं।
भीड़ और ट्रैफिक में अपनी उपज से भरे वाहनों के साथ हैरान परेशान किसान समय पर नीलामी न हो पाने से स्थानीय मंडी प्रशासन ओर व्यापारी दोनो को दुखी मन से कोसता हे । इस भारी अव्यवस्था से केवल व्यापारियों का ही नुकसान होता है _ यह सब आज की हक़ीक़त है।
*नीति पर उठ रहे सवाल*
मंडी के वर्तमान हालात ने उसके प्रबंधन पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। जहां आसपास की मंडियों में इन दिनों सिर्फ सोयाबीन की 20 हजार बोरी दैनिक नीलाम हो रही है, वहीं आष्टा में कुल नीलामी सिमटती जा रही है। किसानों के मन में अब यह बात घर करने लगी है कि अगर यही आलम रहा तो ऐसी स्थिति में वे आगे से आष्टा मंडी छोड़ कर अन्य मंडियों का रुख  करेंगे ; जिसका सीधा नुकसान मंडी को एवं स्थानीय व्यापार को झेलना पड़ेगा।
*समाधान मौजूद,इच्छाशक्ति गायबस्थिति*

गंभीरता के बावजूद, प्रशासन की उदासीनता हैरान करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भोपाल नाके के पास स्थित बड़े खाली ग्राउंड का उपयोग कर, वहां से आने वाली ट्रॉलियों को अस्थायी पार्किंग में ही रोककर व्यवस्थित प्रवेश दिया जा सकता है। इसी तरह, कन्नौद-खातेगांव की दिशा से आने वाले वाहनों को नए दशहरा मैदान पर व्यवस्थित कर, मंडी के अंदर प्रवेश दिलाने की व्यवस्था बनाई जाए तो हालात बड़ी हद तक सुधर सकते हैं।
मगर आश्चर्य है कि इतना आसान हल अपनाने के लिए भी प्रशासन तैयार नहीं दिखता?
अंदरूनी व्यवस्था भी लचरमंडी परिसर के भीतर भी व्यवस्थागत संकट है। केवल एक शेड के नीचे ही सोयाबीन का एक लॉट सिंगल डाले लगवाने से भी परिसर एक तरफ पूरी तरह से जाम होकर सारी व्यवस्था को चौपट हो रही हे जबकि सोयाबीन के एक से अधिक फुटगर विक्रेताओं के वाहन सीमित रहने से यह फ़ुट्गर वाले शेड लगभग खाली पड़े रहते हे,
यह एक बड़ी लापरवाही है। जिस ओर मंडी प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा हे।
ऐसे में प्रतिदिन सोयाबीन की नीलामी 20-30 हजार क्विंटल से घटकर महज़ 10-12 हजार क्विंटल पर जा पहुँची है। नुकसान और परेशानी दोनों का बोझ व्यापारी और किसान बराबर उठा रहे हैं।

*जरूरी है प्रशासन की फौरन पहल*

अब वक्त आ गया है कि मंडी और प्रशासन दोनों जागें। सोयाबीन के सभी नीलामी शेड का समुचित उपयोग कर, सभी तरह के वाहन सभी शेड में लगवाए, जिससे कि आधे परिसर में लगने वाले बार बार के जाम से निजात मिल जावेगी । साथ ही मंडी के बाहर स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन लागू करें—तो अफरातफरी पर लगाम लग सकती है। किसानों और व्यापारियों की एक ही माँग है—शीघ्र और असरदार व्यवस्था, जिससे आष्टा मंडी का गौरव और किसान-व्यापारी दोनों का विश्वास लौट सके।
देखना होगा आखिर स्थानीय प्रशासन ओर मंडी प्रशासन इस समस्या को लेकर कब तक जागरूक होता हे ?

Recent Posts

ग्रामीण अंचलों में उत्खनन माफिया बेलगाम जंगल, चरणोई और शासकीय भूमि पर खुलेआम खुदाई—प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल? आष्टा। दिनेश शर्मा आष्टा नगर के आसपास स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में उत्खनन माफिया बेखौफ होकर जंगलों, चरणोई भूमि एवं शासकीय जमीनों पर अवैध उत्खनन कर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब लंबे समय से खुलेआम चल रहा है, फिर भी जिम्मेदार प्रशासनिक अमला मौन साधे हुए है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक प्रभावशाली उत्खनन माफिया बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के निजी जमीन की आड़ लेकर बड़े पैमाने पर खुदाई कर रहा है। इस अवैध उत्खनन में न केवल संबंधित किसान की भूमि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि आसपास की शासकीय भूमि और चरणोई जमीन भी बेरहमी से खोद डाली गई है। सूत्र यह भी बताते हैं कि गोपालपुर–चिन्नीथा क्षेत्र में एक उत्खनन माफिया द्वारा भारी स्तर पर अवैध खुदाई की जा रही है। खासकर गोपालपुर के बड्ढले क्षेत्र में चल रही खुदाई और मिट्टी/मोरम के परिवहन की कोई वैधानिक अनुमति अब तक जारी नहीं हुई है, इसके बावजूद प्रतिदिन मशीनों से खुदाई और वाहनों के जरिए परिवहन जारी है। इस बात की गवाही अवैध खनन से माफियाओ द्वारा सरकारी जमीनों को बड़े बड़े तालाब नुमा आकार में कर दी है । बताया जा रहा है कि संबंधित माफिया ने किसान से निजी आर्थिक समझौते के आधार पर उसकी जमीन का उपयोग करते हुए, पास की शासकीय बड्ढले भूमि को भी खोदकर तालाब का रूप दे दिया है। यह सीधे-सीधे शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और नियमों की खुली अवहेलना का मामला है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि स्थानीय प्रशासन को इस पूरे अवैध उत्खनन की जानकारी न हो, ऐसा मानना मुश्किल है? इसके बावजूद न तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही मशीनें जब्त की गई हैं। प्रशासन की यही उदासीनता उत्खनन माफियाओं का हौसला बढ़ा रही है। जानकारो का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लगाई गई, तो पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने के साथ-साथ सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होता रहेगा। जिला खनिज प्रशासन ,और स्थानीय प्रशासन को चाहिए की मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और अवैध उत्खनन रोक लगावे ।

आष्टा | नलों में ज़हर! दूषित पानी से जनता की सेहत से खुला खिलवाड़, नपा बे परवाह । आष्टा शहर में इन दिनों नलों से पानी नहीं, बीमारियाँ बह रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की आँखों पर जैसे लापरवाही की पट्टी बंधी हुई है।

आष्टा | अव्यवस्था, पक्षपात और सवालों के बीच मना 77वां गणतंत्र दिवस देश का 77वां गणतंत्र दिवस आष्टा नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शासकीय एवं अशासकीय संस्थानों में ध्वजारोहण हुआ, देशभक्ति के संदेश गूंजे और बच्चों की प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बनाया।

error: Content is protected !!