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‘बाद में सुनवाई करते हैं…’ संदेशखाली मामले में सिब्बल ने ऐसी क्या दी दलील, CJI चंद्रचूड़ ने बदल लिया मन

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल के संदेशखाली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने बीजेपी सांसद सुकांत मजूमदार की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय की विशेषाधिकार समिति द्वारा पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य के खिलाफ जारी नोटिस पर सोमवार को रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टि डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच के सामने आज यह मामला उठा. एक वक्त सीजेआई चंद्रचूड़ इस मामले की सुनवाई टालने जा रहे थे. हालांकि पश्चिम बंगाल के अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ऐसी दलील दी कि सीजेआई ने अपना मन बदल लिया और लोकसभा सचिवालय को नोटिस जारी करते हुए उससे जवाब मांग लिया.

दरअसल पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल के हिंसा प्रभावित संदेशखाली जाने से रोकने पर बीजेपी कार्यकर्ताओं की पुलिससे झड़प हो गई थी, जिसमें मजूमदार को चोटें आईं थीं. उनकी शिकायत पर लोकसभा की प्रिविलेज कमेटी ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी, उत्तर 24 परगना के डीएम-एसपी और संबंधित थानाध्यक्ष को समन जारी कर 19 फरवरी को पेश होने का आदेश दिया था.

जब सीजेआई ने बदल लिया मन
ऐसे में इन अधिकारियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने सीजेआई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली बेंच के सामने यह मामला उठाया. इस पर सीजेआई ने कहा कि हमने यह याचिका पढ़ी नहीं है, इसलिए इसे सुनवाई के लिए बाद में लिस्ट करते हैं. हालांकि फिर कपिल सिब्बल ने बताया कि प्रिविलेज कमेटी ने इन अधिकारियों को आज ही पेश होने के लिए बुलाया है. उनकी यह दलील सुनकर बेंच ने फिर मामले की सुनवाई जारी रखी.

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वहीं अधिकारियों की तरफ पेश दूसरे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि मुख्य सचिव, डीएम और पुलिस कमिश्नर मौके पर मौजूद नहीं थे, लेकिन उसके बाद भी प्रिविलेज कमेटी ने उनको तलब किया. इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘संदेशखाली में धारा 144 लगी हुई थी. ऐसे में धारा-144 का उल्लंघन करके की गई राजनीतिक गतिविधि विशेषाधिकार का हनन नहीं हो सकती.’

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लोकसभा सचिवालय ने समन का किया बचाव
वहीं इस मामले में लोकसभा सचिवालय की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रिविलेज नोटिस पर रोक लगाने के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह विशेषाधिकार समिति की पहली बैठक है. उन्होंने कहा, ‘उन पर कोई आरोप नहीं लगाया जा रहा. यह एक नियमित प्रक्रिया है. एक बार जब कोई सांसद नोटिस भेजता है और अध्यक्ष को लगता है कि मामले पर गौर करने लायक कुछ है तो नोटिस जारी किया जाता है.’

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने लोकसभा सचिवालय व अन्य को नोटिस जारी करते हुए 4 हफ्तों के भीतर जवाब मांगा और इस बीच निचले सदन की समिति की कार्यवाही पर रोक लगा दी.

'बाद में सुनवाई करते हैं...' संदेशखाली मामले में कपिल सिब्बल ने ऐसी क्या दी दलील, CJI चंद्रचूड़ ने बदल लिया मन

बता दें कि सांसद सुकांत मजूमदार और अन्य को पिछले सप्ताह संदेशखाली में प्रवेश करने से रोक दिया गया था. संदेशखाली इलाके में कई महिलाओं ने तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता शाहजहां शेख और उनके समर्थकों पर जबरदस्ती जमीन हड़पने और यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाए हैं, जिसके बाद से इलाके में तनाव व्याप्त है.

Tags: DY Chandrachud, Kapil sibal, Supreme Court, West bengal

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