RNI NO MPHIN/2023/91045

प्रधान संपादक:- श्री दिनेश शर्मा
मुख्य संपादक:- श्री पीयूष शर्मा

झारखंड के इन नाराज 8 विधायकों ने फिर बदली लोकेशन, मांगों पर अब भी अड़े, क्या बजट सत्र में ही हो जाएगा खेला?- jharkhand-congress-mla-again-changed-their-location-from-a-resort-in-mahipalpur-said-will-not-join-budget-session – News18 हिंदी

रांची/दिल्ली. दिल्ली के जिस रिजॉर्ट में कल कांग्रेस के आठ विधायक रुके हुए थे, वे सभी विधायक यहां से निकल गए हैं. महिपालपुर में एक रिजॉर्ट में शनिवार 17 फ़रवरी की रात 1.30 बजे ये सभी विधायक पहुंचे थे जबकि कल रात 10.30 बजे यहां से निकल गए हैं. करीब 21 घंटे तक इस रिजॉर्ट में ये सभी आठ नाराज एमएलए रुके थे. कल रात से इन लोगों ने अपना लोकेशन बदल दिया है. जानकारी के अनुसार इन विधायकों से कांग्रेस की तरफ से झारखंड के लिए बनाए गए आब्जर्वर उमंग सिंघार ने बात की थी.

बताया जा रहा है कि उसके बाद कल कांग्रेस के झारखंड प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने इनसे बात की. दिल्ली के इस रिजॉर्ट में करीब तीन घंटे तक गुलाम अहमद मीर इनके साथ रहे. पहले उन्होंने सभी आठ विधायक से एक साथ मुलाकात की. उसके बाद सभी से वन टू वन बात की. सूत्रों के मुताबिक इन विधायको की बातों से वे काफी हद तक सहमत भी दिखे और इनकी तरफ से उठाए गए कई मुद्दे को सही बताया.

तल्ख तेवर अपनाए हुए हैं सभी विधायक

सूत्रों के मुताबिक प्रभारी से मुलाकात के बाद भी ये सभी विधायक तल्ख तेवर अपनाए हुए हैं. इनका कहना है कि हम तब तक रांची नहीं लौटेंगे जब तक हमारी मांग नहीं मानी जाती है. इनका कहना है कि 23 फरवरी से झारखण्ड में बजट सत्र में भी वो हिस्सा नहीं लेंगे. बजट सत्र के दौरान मनी बिल पास कराना होता है, लिहाजा इन विधायको का समर्थन सरकार के लिए जरूरी होगा. अब देखना है कि प्रभारी इनकी बात को आलाकमान तक किस तरह पहुंचाते हैं और आलाकमान कैसे इनकी बातों को मानता है.

कांग्रेस विधायकों की है यह मांग

विधायक चाहते हैं कि आलमगीर आलम मंत्री भी हैं और सीएलपी लीडर भी, लिहाजा एक पद वो छोड़ें. इसके अलावा बाकी तीन मंत्री भी इनकी बात नहीं मानते लिहाजा ये हटाए जाएं. क्योंकि ये अपने क्षेत्र में अपना और अपने वर्कर्स के जरिए विकास का काम नहीं करा पा रहे हैं. विधान सभा चुनाव इसी साल के अंत में है लिहाज़ा ये चिंतित हैं. इनका मानना है कि एक मंत्री और भी बन सकता है इसलिए वो पद इन विधायको में से बने यानी पांचवां मंत्री कांग्रेस कोटे से हो. एक महिला को मंत्री बनाए जाने की मांग इन्होंने की है. ये विधायक चाहते हैं कि उनकी मुलाकात पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से हो.

दिल्ली पहुंचे हैं ये 8 विधायक

अनूप सिंह
डॉ इरफान अंसारी
अम्बा प्रसाद
भूषण बाड़ा
दीपिका पांडेय सिंह
राजेश कच्छप
सोनाराम सिंकू
उमाशंकर अकेला

Tags: Jharkhand Congress, Jharkhand news, Ranchi news

Source link

Recent Posts

ग्रामीण अंचलों में उत्खनन माफिया बेलगाम जंगल, चरणोई और शासकीय भूमि पर खुलेआम खुदाई—प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल? आष्टा। दिनेश शर्मा आष्टा नगर के आसपास स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में उत्खनन माफिया बेखौफ होकर जंगलों, चरणोई भूमि एवं शासकीय जमीनों पर अवैध उत्खनन कर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब लंबे समय से खुलेआम चल रहा है, फिर भी जिम्मेदार प्रशासनिक अमला मौन साधे हुए है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक प्रभावशाली उत्खनन माफिया बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के निजी जमीन की आड़ लेकर बड़े पैमाने पर खुदाई कर रहा है। इस अवैध उत्खनन में न केवल संबंधित किसान की भूमि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि आसपास की शासकीय भूमि और चरणोई जमीन भी बेरहमी से खोद डाली गई है। सूत्र यह भी बताते हैं कि गोपालपुर–चिन्नीथा क्षेत्र में एक उत्खनन माफिया द्वारा भारी स्तर पर अवैध खुदाई की जा रही है। खासकर गोपालपुर के बड्ढले क्षेत्र में चल रही खुदाई और मिट्टी/मोरम के परिवहन की कोई वैधानिक अनुमति अब तक जारी नहीं हुई है, इसके बावजूद प्रतिदिन मशीनों से खुदाई और वाहनों के जरिए परिवहन जारी है। इस बात की गवाही अवैध खनन से माफियाओ द्वारा सरकारी जमीनों को बड़े बड़े तालाब नुमा आकार में कर दी है । बताया जा रहा है कि संबंधित माफिया ने किसान से निजी आर्थिक समझौते के आधार पर उसकी जमीन का उपयोग करते हुए, पास की शासकीय बड्ढले भूमि को भी खोदकर तालाब का रूप दे दिया है। यह सीधे-सीधे शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और नियमों की खुली अवहेलना का मामला है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि स्थानीय प्रशासन को इस पूरे अवैध उत्खनन की जानकारी न हो, ऐसा मानना मुश्किल है? इसके बावजूद न तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही मशीनें जब्त की गई हैं। प्रशासन की यही उदासीनता उत्खनन माफियाओं का हौसला बढ़ा रही है। जानकारो का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लगाई गई, तो पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने के साथ-साथ सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होता रहेगा। जिला खनिज प्रशासन ,और स्थानीय प्रशासन को चाहिए की मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और अवैध उत्खनन रोक लगावे ।

आष्टा | नलों में ज़हर! दूषित पानी से जनता की सेहत से खुला खिलवाड़, नपा बे परवाह । आष्टा शहर में इन दिनों नलों से पानी नहीं, बीमारियाँ बह रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की आँखों पर जैसे लापरवाही की पट्टी बंधी हुई है।

आष्टा | अव्यवस्था, पक्षपात और सवालों के बीच मना 77वां गणतंत्र दिवस देश का 77वां गणतंत्र दिवस आष्टा नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शासकीय एवं अशासकीय संस्थानों में ध्वजारोहण हुआ, देशभक्ति के संदेश गूंजे और बच्चों की प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बनाया।

error: Content is protected !!