आष्टा वार्ड नंबर 1 में आंगनवाड़ी निर्माण पर भ्रष्टाचार की आशंका, शुरुआती चरण में ही घटिया सामग्री और तकनीकी अनियमितताओं का आरोप
करीब 15 लाख रुपये की लागत से बन रही आंगनवाड़ी, जिम्मेदार इंजीनियर की चुप्पी और नपा की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*

आष्टा नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 1 में लगभग 15 लाख रुपये की लागत से निर्मित की जा रही आंगनवाड़ी अपने प्रारंभिक निर्माण चरण में ही विवादों में घिरती नजर आ रही है। निर्माण स्थल पर उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी खामियों को देखकर स्थानीय नागरिकों में गहरी शंकाएं पैदा हो गई हैं। हालात ऐसे हैं कि निर्माण कार्य को देखकर यह अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों ने अन्य निर्माण कार्यों की तरह यहां भी भ्रष्टाचार की इबारत लिखना शुरू कर दिया है।
निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग और मानकों की अनदेखी को लेकर जब नगर पालिका के जिम्मेदार इंजीनियर अनिल धुर्वे से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो न तो उन्होंने फोन उठाया और न ही वे कार्यालय में उपलब्ध पाए गए। हर बार यही जवाब मिला कि “साहब फील्ड में गए हैं।” सवाल यह है कि आखिर वह कौन-सी फील्ड है, जहां इंजीनियर साहब निरीक्षण कर रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत में नपा द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में रहती है। वही नपा के निर्माण कार्यों में अक्सर ठेकेदारों को नपा का पानी टैंकर उपलब्ध रहता हे, कितने ठेकेदार पानी की रशीद कटवाते हे किसी को नहीं मालूम , प्रथम दृष्टया तो लगता हे ठेकेदारों पर नपा ,पानी ओर टैंकर की मेहरबानी बनाए रखती हे ।

नगर पालिका द्वारा शहर में पहले से कराए गए सड़क, नाली और चेंबर जैसे निर्माण कार्यों की स्थिति स्वयं यह बयां कर रही है कि शहर का तथाकथित “कायाकल्प” किस स्तर के भारी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा है। अब आंगनवाड़ियों में भी घटिया निर्माण सामने आना इंजीनियर अनिल धुर्वे की कार्यशैली और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
इंजीनियर की खामोशी और जवाबदेही से बचने का रवैया इस बात का संकेत देता है कि नगर पालिका में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहराई तक फैल चुकी हैं। यही कारण है कि ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार भी दूसरे लाइसेंसों की आड़ में बेखौफ होकर काम कर रहे हैं और खुलेआम बेहद घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे या फिर यह आंगनवाड़ी भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाएगी। जनता की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं, लेकिन फिलहाल जवाबों की जगह सिर्फ चुप्पी और अनियमितताओं का शोर सुनाई दे रहा है।







