VIT यूनिवर्सिटी सीहोर (भोपाल) पीलिया कांड ने साफ कर दिया है कि फीस प्रीमियम है, लेकिन व्यवस्थाएं दो नंबर की और ज्यादातर लापरवाही पर टिकी हैं।
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*

बिगड़ी हालत के बाद भी प्रबंधन का रवैया छात्रों को उकसाने वाला दिखा, जिसने कैंपस को एक शांत यूनिवर्सिटी से सीधा दंगाई ज़ोन में बदल दिया।
बीमारी, गंदा पानी और मेस की सड़ांधपिछले कुछ हफ्तों से हॉस्टल में रहने वाले दर्जनों छात्रों में पीलिया जैसे लक्षण दिखे, कई छात्रों को सीहोर, आष्टा और भोपाल के हॉस्पिटल तक जाना पड़ा।
छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में सप्लाई हो रहा पानी दूषित था, RO प्लांट और टैंकों की सफाई नहीं हो रही थी और मजबूरन उन्हें कई दिनों तक बोतलबंद पानी खरीदना पड़ा।
मेस का खाना लगातार घटिया क्वालिटी का होने जैसा आरोप भी छात्रों ने लगाया ।
कई छात्रों ने बदबूदार, अधपका और असुरक्षित भोजन पर आपत्ति उठाई, लेकिन शिकायतें फाइलों में ही दबी रहीं
*शांत शिकायत से उबलता बगावत*
छात्रों का कहना है कि वे कई दिनों से पानी और खाने की शिकायत लिखित और मौखिक रूप से कर रहे थे, मगर प्रशासन या तो टालता रहा या सवाल उठाने वालों को दबाने की कोशिश करता रहा।
जैसे ही कई और बच्चे बीमार पड़े, छात्रों का धैर्य टूट गया और रात में हजारों की संख्या में वे हॉस्टल से निकलकर एकजुट हो गए।
गुस्सा तब और भड़क उठा जब छात्रों ने आरोप लगाया कि गार्ड और कुछ स्टाफ ने बातचीत करने आए छात्रों के साथ बदसलूकी और मारपीट की, जिसके बाद भीड़ सीधे उग्र हो गई ।
*कैंपस बना जंग का मैदान*
लगभग 3 से 4 हजार छात्रों की भीड़ ने देखते ही देखते कैंपस को घेर लिया, कमरों और बिल्डिंगों के शीशे तोड़े गए, कई जगह जबरदस्त तोड़फोड़ हुई।गुस्साए छात्रों ने कैंपस में खड़ी बस, कारें, एक एंबुलेंस और अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया, धुएं के गुबार दूर तक हाईवे से नजर आये।
रिपोर्ट्स के मुताबिक चांसलर/चांसलर के बंगले तक की दीवारें व संरचना भी छात्रों के निशाने पर आ गई, जिससे साफ है कि नाराजगी अब केवल मेस तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे सिस्टम के खिलाफ फूट पड़ी।
, छुट्टी और ‘हिटलरशाही’ वाला रवैया के बाद हालात बेकाबू होते ही आष्टा एसडीओपी, सीहोर पुलिस और आसपास के कई थानों का बल कैंपस में तैनात करना पड़ा, तब जाकर देर रात तक स्थिति काबू में लाई जा सकी।
प्रशासन ने बिना साफ और पारदर्शी कारण बताए कॉलेज को तुरंत बंद कर 30 नवंबर तक छुट्टी घोषित कर दी, जिससे हजारों छात्र-छात्राएं अचानक हाईवे पर अपने घर जाने के लिए खड़े नजर आए।कई छात्र छात्रों के स्थानीय संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने आरोप लगाया कि मोटी फीस वसूलने वाला प्रबंधन न तो साफ पानी दे पा रहा है, न ढंग का भोजन, और अब विरोध करने पर बच्चों को ही दोषी ठहराकर उन्हें बाहर कर रहा है।
*मौत के दावे, प्रशासन का इंकार*
अगला सवालछात्रों के एक वर्ग ने दावा किया है कि दूषित पानी और पीलिया से एक से अधिक गंभीर केस और मौतें हुई हैं, जबकि प्रशासन और स्थानीय अधिकारी अब तक किसी भी मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि से बच रहे हैं।
जिला प्रशासन और यूनिवर्सिटी दोनों ने अभी तक बीमार छात्रों की पूरी लिस्ट, मेडिकल रिपोर्ट और पानी/भोजन की जांच का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है, जिससे शक और अविश्वास और बढ़ रहा है।
उधर, छात्र संगठनों ने जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई, मुआवज़ा, और हॉस्टल-मेस सिस्टम की ओपन जांच पारदर्शिता के साथ करने की मांग करी , इसी विरोध के चलते छात्र संगठन ने vit यूनिवर्सिटी के मेन गेट पर प्रबंधन का पुतला भी जलाया ।







