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*आष्टा की सड़कों पर “जाम का जाल”* *पैदल चलना भी चुनौती, सिस्टम बेपरवाह!*

*आष्टा की सड़कों पर “जाम का जाल”*
*पैदल चलना भी चुनौती, सिस्टम बेपरवाह!*

*दिनेश शर्मा | आष्टा*

शहर इन दिनों एक ऐसे ट्रैफिक जाल में फंस चुका है, जहाँ चलना भी संघर्ष बन गया है। शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है, लेकिन जिम्मेदार सिस्टम मानो आँखें मूंदे बैठा है। हालात इतने बिगड़े कि…

 

सिकंदर बाजार से शाहजनी मस्जिद होते हुए बड़ा बाजार पीपल के नीचे तक रोज़ाना जाम की स्थिति बनी रहती है दुकानों के सामने खड़े होने वाले बेतरतीब वाहनों के लिए वाहन मालिको के साथ साथ दुकानदार भी उतने ही जिम्मेदार हे,
हालात यह बने रहते है कि पैदल चलने वालों के लिए जगह नहीं रहती सड़कें पूरी तरह वाहनों से घिर जाती हे । और इसी बीच जब
अचानक चार पहिया वाहन या हाथ ठेले आ जाते हे फिर तो पैदल वालो का भगवान ही मस्लिक रहता हे क्योकि फिर तो
घंटों जाम,लगना आम बात हे यही हाल शहर के सबसे व्यस्त मार्ग बुधवारा के भी हे जहां पूरे दिन चार पहिया वाहन ट्राफिक व्यवस्था को घंटों जाम करते हे यह अब कोई अपवाद नहीं, बल्कि रोज़ की हकीकत बन चुकी हे,
अव्यवस्था की सबसे बड़ी वजह यह हे की दुकानों के सामने बेतरतीब खड़े दोपहिया वाहन पूरे मार्ग को घेरे रखते हे,वैसे भी अभी शादी-ब्याह सीजन चल रहा हे तो पूरे शहर में पूरे दिन शहर में भीड़ बनी रहती हे
ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए शहर पहुंच रहे हे ऐसे में सड़क पर उनके दो पहिया बेतरतीब खड़े रहने वाले वाहन और ईसी अव्यवस्था के बीच में टेम्पो और हाथ ठेले बेखौफ होकर जब व्यस्त बाजारों में प्रवेश करते है तो फिर तो आम जनता का पैदल निकलना भी भारी मुश्किल भरा रहता है
वाहन चालकों के इस मनमाने रवैये से लगता है वाहन चालकों में कानून का डर लगभग खत्म हो चुका है।
ट्रैफिक पुलिस पर शहरवासी आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस का ध्यान शहर के बाहर चालानी कार्रवाई पर ज्यादा रह रहा हे आंतरिक ट्रैफिक मैनेजमेंट पूरी तरह नजरअंदाज कर रही हे ट्रैफ़िक पुलिस।
लोग अब यहाँ तक कहने लगे हे की क्या सिर्फ शहर के बाहर चालान काटना ही ट्रैफ़िक पुलिस की जिम्मेदारी है?आंतरिक अव्यवस्था से मानो कोई लेना देना ही नहीं हे ।
क्योकि रोज़ाना लगने वाले जाम से समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रहीं हैं,समय ख़राब होता ही सो अलग ।
स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित
होती हे
इतना ही नहीं अगर किसी कारणवश इस व्यस्त इलाके में एम्बुलेंस और इमरजेंसी सेवाओं को जाने का काम पड़ जावे तो इतनी आसानी से यह आवश्यक सेवा भी प्रवेश नहीं कर सकती , इनके फंसने का खतरा बना रहता है ।ट्राफिक पुलिस को चाहिए की बाजार क्षेत्र में नो-पार्किंग सख्ती से लागू करे वही दुकानों के सामने खड़े वाहनों पर तुरंत चालान की कार्यवाही करे,
हाथ ठेलों और भारी वाहनों के लिए समय निर्धारण करे ताकि रोहण ट्राफिक व्यवस्था में सुगमता बनी रहें । अब अतिवावश्यक दिखाई दे रहा हे की शहर के अंदर रोजाना इन व्यस्त मार्गो पर ट्रैफिक पुलिस की मैदानी मौजूदगी बढ़े ।
क्योकि विदित रहे
आष्टा की सड़कों पर बढ़ती अव्यवस्था अब केवल परेशानी नहीं, बल्कि शहर की छवि और सुरक्षा पर सीधा खतरा बन चुकी है।

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