आष्टा
“मां शीतला की भक्ति में डूबा शहर: शीतला सप्तमी पर मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब” मंदिर के हो रहे जीर्णोद्धार से आया भव्य स्वरूप
“आज शीतला सप्तमी है… आस्था, श्रद्धा और परंपरा का वो पावन दिन, जब नगर के सनातनी परिवार की महिलाएं मां शीतला के दरबार में ठंडे भोग के साथ सुख-समृद्धि और रोगमुक्त जीवन की कामना करती हैं।”
दिनेश शर्मा आष्टा हलचल
आष्टा। शीतला सप्तमी के पावन अवसर पर शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। नगर में बीती अर्धरात्रि पश्चात से ही मां शीतला मंदिरों में महिलाओं की लंबी कतारें लगी रहीं। माता बहनों ने मां शीतला को ठंडे व्यंजन का भोग लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि और रोगों से मुक्ति की कामना की।आज के दिन माँ शीतला मंदिर में

महिलाओं और बच्चों की विशेष उपस्थिति रहती हे । महिलाएं सुबह जल्दी उठकर मां कब पूजा-अर्चना करती हे इसके बाद पारंपरिक रूप से एक दिन पहले बने ठंडे भोजन का प्रसाद पूरा परिवार पूरे दिन ग्रहण करता हे, ऐसी मान्यता हे कि आज सप्तमी के दिन चूल्हा नहीं जलता हे। चूंकि मां को भी एक दिन पूर्व बने भोजन का ही भोग लगता हे, बस उसी भोग प्रसादी स्वरूप ठंडे भोजन को सब ग्रहण करते हे ।
मान्यता है कि मां शीतला की पूजा करने से चेचक सहित अनेक रोगों से रक्षा होती है।
शहर के प्रमुख शीतला माता मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहा और पूरा वातावरण “जय मां शीतला” के जयकारों से गूंजउठा ।

आज शीतला सप्तमी के अवसर पर पूजा करने पहुंची बड़ी संख्या में महिलाओं ने मंदिर समिति की खूब प्रशंसा करते हुए मंदिर के भव्य स्वरूप को बहुत सराहा ।
आपको बता दे शहर का मुख्य शीतला माता मंदिर वर्षों से बेरूखी का शिकार होकर दयनीय स्थिति ने जर्जर हालत में हो गया था , की शहर के बड़े समाज सेवियों ओर कर्मठ लोगों ने मां शीतला के नाम से मंदिर निर्माण समिति बनाई ओर निस्वार्थ होकर जीर्णोद्धार ने जुट गए।
आर्थिक समस्याओं जूझते हुए भी समिति ने हिम्मत नहीं हारी ओर आज मां शीतला माता मंदिर बहुत ही मनमोहक होकर भव्य स्वरूप ले चुका हे,

समिति के प्रमुख दिनेश सोनी से मंदिर के निर्माण ओर भव्य स्वरूप को लेकर बात हुई तो उन्होंने सब मा शीतला की कृपा से ही होना बताया साथ में शहर वासियों से अपील की सब लोग आगे आए ओर अपना सहयोग प्रदान करे , क्योंकि अभी मंदिर ने बहुत कार्य होना हे जोकि जनमत के बिना संभव नहीं रहता हे । विदित थे पूरा शहर लगभग अपने घरों में शादी ब्याह के अवसर पर इसी मंदिर में माता को पूजने आते हे,







