🔥 *खबर लिखी तो बौखलाया मास्टर, पत्रकार को दी गालियाँ और धमक IIअब सवाल ये—सच लिखना गुनाह है या लापरवाही छुपाना अधिकार?*
*पत्रकार को दी गालियाँ और जान से मारने की धमकी, बीआरसीसी को सौंपा ज्ञापन*— *निलंबन की मांग तेज*
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*
सच लिखना क्या अब जुर्म हो गया है? ग्राम नरपा खेड़ी के शासकीय स्कूल में समय से पहले ताला लगने की खबर प्रकाशित होते ही एक शिक्षक का आपा इस कदर खो गया कि उसने पत्रकार को ही निशाने पर ले लिया।
विगत 19 फरवरी को ब्लॉक आष्टा के ग्राम नरपा खेड़ी स्थित स्कूल के समय से पूर्व बंद होने को लेकर पत्रकार माखन सिंह चौहान द्वारा खबर प्रकाशित की गई थी। खबर के बाद स्कूल में पदस्थ शिक्षक नारायण सिंह वर्मा ने पत्रकार को मोबाइल पर संपर्क कर अपनी लापरवाही का ठीकरा उन्हीं पर फोड़ते हुए जमकर गाली-गलौच की और यहां तक कि मारने की धमकी भी दे डाली।
*फोन पर गालियाँ… और धमकी भी!*
सूत्रों के अनुसार, शिक्षक ने फ़ोन पर बातचीत के दौरान अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया।
हालांकि पत्रकार माखन सिंह चौहान ने पूरे घटनाक्रम में शालीनता बनाए रखी और उकसावे के बावजूद संयम नहीं खोया।
अपने साथ हुए दुर्व्यवहार से आहत पत्रकार ने सिद्धिकगंज थाने में प्रथम दृष्टया शिकायत दर्ज कराई और
कानूनी कार्रवाई की मांग की वहीं
शिक्षा विभाग के ब्लॉक समन्वयक अधिकारी (BRCC) को सभी पत्रकारों के साथ एक ज्ञापन सौंपा और संबंधित शिक्षक के निलंबन की मांग प्रबलता से उठाई ।
*विभाग हरकत में, कारण बताओ नोटिस जारी*
जब इस मामले में ब्लॉक समन्वयक अधिकारी से पक्ष जानना चाहा गया तो उन्होंने बताया:
“संबंधित शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है। उनका जवाब प्राप्त हुआ है, जो संतोषजनक नहीं है। मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।”
*पीड़ित पत्रकार का दो टूक बयान*
पत्रकार माखन सिंह चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“यदि मेरे साथ न्याय नहीं हुआ तो मैं उच्च स्तर तक जाऊंगा। गाली-गलौज और धमकी की कॉल रिकॉर्डिंग मैंने विभाग को सौंप दी है। संबंधित ऑडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।”
आज धटित घटनाक्रम को देखते हुए बड़ा सवाल यह ही की—-
*क्या अब स्कूल की लापरवाही उजागर करना अपराध है?*
*क्या शिक्षक अनुशासन छोड़कर दबंगई पर उतर आए हैं?*
*और क्या शिक्षा विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा?* Mohan
आष्टा में यह मामला अब केवल एक पत्रकार और शिक्षक के बीच का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जवाबदेही का मुद्दा बन चुका है।







