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*आष्टा में अवैध कॉलोनियों का खुला खेल कलेक्टर के सख़्त आदेश भी बेअसर, भूमाफिया बेख़ौफ़ — प्रशासन मौन**

**आष्टा में अवैध कॉलोनियों का खुला खेल
कलेक्टर के सख़्त आदेश भी बेअसर, भूमाफिया बेख़ौफ़ — प्रशासन मौन**
*आष्टा। दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*
नगर में भूमाफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे न सिर्फ़ प्रशासनिक नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि खुलेआम शासन–प्रशासन के आदेशों का मखौल भी उड़ा रहे हैं। हालात यह हैं कि लगभग प्रतिदिन एक नई अवैध कॉलोनी शहर और उसके आसपास जन्म लेती दिखाई दे रही है। ओर नियमों से अनजान लोग लोभ में आकर फंस रहे हे । ओर झूठे सब्जबाग का सपना देख अपनी जीवन की गाड़ी मेहनत की कमाई को फंसा रहे हे,
ज्ञात रहे कि जिला कलेक्टर बालागुरु के द्वारा बीते दिसंबर माह में संपूर्ण जिले में अवैध कॉलोनियों पर शिकंजा कसने हेतु सख़्त निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों में जिले के सभी राजस्व अधिकारियों, नगरपालिका अधिकारियों को स्पष्ट रूप से आदेशित किया गया था कि बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों एवं कॉलोनी के नाम पर बेचे जा रहे भूखंडों की जांच कर एक सप्ताह के भीतर सूची प्रस्तुत की जाए। लेकिन क्या
जांच हुई,?  यह किसी को नहीं मालूम? जानकारी आज भी अंधेरे में ही दिखाई दे रही हे ।
कलेक्टर के आदेश के बाद हो सकता है काग़ज़ों में जांच की प्रक्रिया चली होगी पर नतीजा किसी भी प्रकार का सामने नहीं आया ओर न ही सार्वजनिक हुआ,इस वजह से ज़मीनी सच्चाई यह है कि आज भी आम शहरी को यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि कौन-सी कॉलोनी वैध है और कौन-सी अवैध ?इसी सूचना के अभाव का लाभ उठाकर भूमाफिया भोले-भाले लोगों को हरे-भरे सपनों का झांसा देकर प्लॉट बेच रहे हैं। ओर करोड़ों में अपने वारे न्यारे कर रहे हैं।
कृषि भूमि पर सड़क का नाटक, मुरम डालकर कॉलोनी घोषित
बिना किसी वैधानिक अनुमति के छोटे-छोटे कृषि भूखंडों पर मुरम डालकर उन्हें “सड़क” का नाम दे दिया जा रहा है और फिर उसी आधार पर धड़ल्ले से प्लॉटिंग की जा रही है। न कोई डायवर्जन, न नामांतरण,न ही पूरी जगह की टीएनसी ओर तो ओर यह भूमाफिया यह भी नहीं जानते होंगे कि कॉलोनी काटने से पहले रेरा की स्वीकृति भी लेनी चाहिए, ओर रेरा किस चिड़िया का नाम है, यह शायद ही जानते होंगे ? लेकिन लगता नहीं हे कि स्थानीय प्रशासन में बैठे जिम्मेदारों से यह खेल छुपा होगा ?फिर भी कार्रवाई नदारद है। यही कारण है कि आये दिन कुकुरमुत्ते की तरह शहर में अवैध कालोनियां जन्म ले रही है।

**शहर के चारों ओर फैला अवैध जाल**

डाबरी हाईवे, इंदौर-भोपाल हाईवे, अलीपुर पटवारी कॉलोनी के पीछे भूमाफियाओं का विशालकाय साम्राज्य ,मुगली रोड, दौराबाद,शुजालपुर रोड, आष्टा-कन्नौद रोड और थाने के पीछे जगमालपुरा रोड सहित शहर के लगभग सभी प्रवेश मार्गों पर भूमाफियाओं ने बाकायदा बोर्ड लगाकर प्लॉट बिक्री शुरू कर रखी है।
हैरानी की बात यह है कि कई कॉलोनियो में तो मकान भी बना कर लोग रहने लगे हे, लेकिन वहां रहने वाले लोग आज भी पानी, सड़क, नाली, सीवरेज और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
बिना विकास, बिना अनुमति — फिर भी बिक्री जारी
न तो भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति,
न ही ग्राम निवेश विभाग एवं रेरा की पूर्ण कानूनी पूर्ति—
इसके बावजूद माफिया बेधड़क प्लॉट बेच रहे हैं। इससे भी अधिक आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि कुछ ऐसी कॉलोनियां, जो आधी-अधूरी या बिना किसी केवैधानिक स्वीकृति के बन रही हे, वहां नगरपालिका द्वारा पानी, बिजली, सड़क जैसी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके पीछे के कारण भी पूरे शहर वासी भली भांति जान ओर समझ रहे है, क्योंकि शहर आज मूलभूत सुविधाओं के अभाव में त्रस्त होकर अपने ही द्वारा किए निर्णय पर पछता रहा हे । बुद्धिजीवियों का कहना हे कि निर्वाचन के समय थोड़ा भी गंभीरता से विचार करते तो शायद आज पछताना नहीं पड़ता?
आज पूरा शहर आवश्यक सुविधाओं के हेरान परेशान हे, नग्गर में जगह जगह पूरी सड़के खोद डाली, लेकिन नपा के टेक्नीशियन यह पता नहीं लगा पा रहे हे कि आखिर नलों ने गंदा पानी कहां से आ रहा है।

*जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी उठते सवाल*

एक-दो एकड़ जैसी सीमांत कृषि भूमि पर भी कॉलोनी के नाम से भूखंड बेचे जा रहे हैं। जिस पैमाने पर यह गतिविधि चल रही है, उससे स्पष्ट है कि अधिकांश तथाकथित कॉलोनाइजरों के पास न तो वैधानिक अनुमति है और न ही आवश्यक अहर्ताएं।
फिर भी भूमाफियाओं का यह खेल बेख़ौफ़ जारी है—और जिम्मेदार विभाग आज भी अनजान बने बैठे हैं।
सवाल यह है…


कलेक्टर के आदेश के बाद तैयार की गई अवैध कॉलोनियों की सूची कहां है? तहसील कार्यालय में  तहसीलदार के रीडर सोलंकी बाबू से जब हमने जानकारी लेना चाही ,तो उन्होंने भी सिरे से मना कर दिया, आज बड़ी बात हे कि जनता को वैध-अवैध कॉलोनियों की जानकारी क्यों नहीं दी जा रही?


बिना अनुमति कॉलोनियों को मूलभूत सुविधाएं देने की स्वीकृति किसने दी? ओर अगर बगैर सुविधाओं के कृषि भूमियों पर कॉलोनियों के नाम पर प्लाट आदि विक्रय हो रहे हे तो आखिर किसकी स्वीकृति हे?
कुल मिलाकर, महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की अनदेखी कर भूमाफिया कॉलोनियां काट रहे हैं और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

 

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