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प्रधान संपादक:- श्री दिनेश शर्मा
मुख्य संपादक:- श्री पीयूष शर्मा

आष्टा *कही -अनकही*——-! *फसल पर पड़ी भगवान की मार ओर मंडी में हुया, चमत्कार*

आष्टा
*कही -अनकही*——-!

*फसल पर पड़ी भगवान की मार ओर मंडी में हुया, चमत्कार*
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*

हु आने मारो दोस्त नट्टू बाजार में कई गया की बाजार की दसा देख अंदाज हुए गयो , भैय्या
दिवाली त्योहार का सन्नाटा ने सब लोग हुन का कान खड़ा करी दिया हे, भलेही फिर बानियां होय या किसान , भगवान ने असा फ़जीता करिया की किसान का साथेसाथ सभी रोई रिया हे,। लाखो रुपया को माल भरी के बापड़ा हूं पूरी दिवाली ग्राहक को रस्ता देखता रिया , ओर दिवाली निकली गईं।
हम कद मानने आला था , बाजार छोड़ी के मोरत दिन सबेर से हम घुसीया मंडी में , बाप रे बाप जिन मंडी में इना समय पांव धरने की जगह नि मिलती हे अबे तो असो लगीयो की बिचारा व्यापारी हुन मुहूर्त ही कसे करेगा ?
खेर पूजा हुई ने मंडी चालू हुई, शुरू की बैलगाड़ी 5600 रुपया मूहर्त में बिकी, बढ़ो मन दुखियों, की प्रदेश की दूसरी मंडी हुन ओर आस पास की मंडी हुन में तो रिकॉर्ड टूटीगया, ओर अपना या इतरा कम भाव, यो सब खेल देखने का बाद मंडी में आगे बढ़या तो ओर चमत्कार नजर आया,बड़ा बड़ा चद्दर का छज्जा ओर चद्दर को हाल अपनी अलग ही कहानी की रया था,।
व्यापारी हुन का वाट्स अप ग्रुप पे नजर फेंकी, तो यहां संघ की कार्यकारी का दो बड़ा कागज दिखाया, हमने जद उनके पढ़या, तो ओर दिमाक घूमयो, अरे यो कसे ? याह तो संघ को नाम ही हयनि, तो कई हुयो , काई शहर का दूसरा व्यापारी गुट हुन की तरह यहां भी दो तो नि हुई गया? क्योंकि समय बढ़ो बलवान होय हे भईया, काई भी हुई सके ?हम भी कदे मानने आला था, पूछी पूछी कि हकीकत जानी तो बताओ कि वा तो संघ का सचिव ने जल्दी बाजी में रात में कागज तैयार करीयो थो तो चूक हुई गई, भैय्या ऐसी भी क्या जल्दी थी , अरे 15 मईना तो हिट गया था और भी निकली जाता।
पर सचिव साब भी कई करे अबे व्यापारी हुन हर कई तो वाट्स अप पर लिखने मंडी गया था
बस फिर मजबूरी को नाम महात्मा गांधी हुई गयो,।

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