*आष्टा *नगर निरीक्षक का विदाई समारोह शहर में चर्चा का विषय बना*
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*
आष्टा किसी भी अधिकारी कर्मचारी का स्थानांतरित होकर आना और जाना कोई नई बात नही हे, अधिकारियों का आना जाना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जो की लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान है,।
इससे पहले भी बीते समय में अनेकों अधिकारी आए और चले भी गए , पर इस तरह का नजारा देखने और सुनने को नही मिला ।जिस तरह से इस बार नगर निरीक्षक का ट्रांसफर के बाद एक व्यक्ति द्वारा निजी स्तर पर बड़े स्वरूप में बिदाई पार्टी और उपहार का कार्यक्रम आयोजित किया गया । इस अचंभित बिदाई समारोह ने पूरे शहर को बहुत कुछ सोचने पर विवश कर दिया । की आखिर कुछ तो हैं वरना यू यकायक बे पर्दा कोई नही होता ?
सफेद कागज पर ब्लेक स्याही की कलम से दी जाने पर्चियों का हिसाब सोचने पर मजबूर कर रहा है की कही इस हिसाब में तो बड़ा कमाल नहीं हे? वरना क्या कारण हो सकता है शहर में बड़े समाज सेवी और दान वीर की भूमिका अदा करने वाला व्यक्ति जिसका सक्षम राजनीतिज्ञों सीधा संवाद होता रहता हो वा व्यक्ति अगर एक थाना प्रभारी का बिदाई समारोह इतने बड़े स्वरूप में करे तो स्वभाविक है बहुत कुछ सोचने को मजबूर करता है साथ ही अनेकों प्रकार की शंकाए और कुशनकाये होना भी लाजमी हो जाता है । यह शंका कितनी सही हे कितनी झूठी है या तो आने वाला समय ही बताएगा ? क्योंकि इस तरह के कार्यकलाप ज्यादा समय तक छुपते नही हे। वैसे कहते हे ना की इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते। फिलहाल तो पूरा शहर इस बिदाई समारोह की चर्चा करके चटकारे ले रहा है।
हम तो बस यही कहेंगे की, किसी ने क्या खूब लिखा है — *फ़क़ीर को ख़ैरात भी देते हैं तो, अख़बार में तस्वीर देते हैं,..*
*मेरे शहर में कुछ ऐसे भी, अमीर रहते हैं…!*






