आष्टा *हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष ने गाड़ा होली का डांडा*
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*
आष्टा – हिन्दू धर्म में होली का त्योहार एक प्रमुख त्योहार है। इसे संपूर्ण देश में किसी ना किसी रूप में मनाते हैं। आखिर इस पर्व की शुरुआत कब से होती है और इस त्योहार में होली का डंडा क्यों 1 महीने पूर्व गाड़ा जाता है आज इसकी शुरुआत बसंत ऋतु प्रारंभ होते ही माघ पूर्णिमा को हो जाती है यह जानकारी देते हुए हिंदू सोशल समिति के अध्यक्ष श्री कालू भट्ट ने कहा कि आज पूर्णिमा के दिन शहर के विभिन्न 100 से अधिक स्थानों पर होली का डंडा गड़ा गया है इसकी विधिवत पूजन करके शुरुआत कर दी गई है वैसे आष्टा शहर में नवाबी परंपरा पांच दिवसीय होली की है लेकिन विगत दो सालों से हम पांच दिवसी होली महादेव होली के रूप में मनाते हैं जिसमें हमारे सीहोर सिद्धपुर नगरी के राष्ट्रीय संत पंडित प्रदीप मिश्रा शामिल होते हैं इस वर्ष भी बड़े ही धूमधाम से होली मनाई जाएगी। कालू भट्ट ने बताया कि
होली के उत्सव का पहला काम होली का डंडा या डांडा चौराहे पर गाड़ना होता है। होली का डंडा एक प्रकार का पौधा होता है, जिसे सेम का पौधा कहते हैं।
हालांकि कई जगहों पर एक स्थान पर दो डांडा स्थापित किए जाते हैं। जिनमें से एक डांडा होलिका का प्रतीक तो दूसरा डांडा प्रहलाद का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद इन डंडों को गंगाजल से शुद्ध करके के बाद इन डांडों के इर्द-गिर्द गोबर के उपले, लकड़ियां, घास और जलाने वाली अन्य चीजें इकट्ठा की जाती है और इन्हें धीरे-धीरे बड़ा किया जाता है और अंत में होलिका दहन वाले दिन इसे जला दिया जाता है। और फिर होली का दहन वाले दिन शौक वाली गैर निकलेगी और इसकी विधिवत पांच दिवसीय शुरुआत हो जाएगी






