*विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर लौहार विश्वकर्मा समाज त्योहार को भव्यता और उत्साह से मनाया सामूहिक विवाह भी हुए संपन्न*
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*

आष्टा। विश्वकर्मा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है विश्व और कर्मा मतलब विश्व का मतलब सारा ब्राह्मण और कर्म का मतलब निर्माता आप सब लोग विश्व निर्माता की सन्तान है। प्रचीनकाल मे दुनियां को गढ़ने का कार्य विश्कर्मा जी ने किया था आज के समय मे दुनिया को सजाने-सँवारने का कार्य आप लोग कर रहे है।
इस आशय के विचार स्थानीय काॅलोनी चैराहा स्थित गीतांजली गार्डन में विश्वकर्मा लौहार समाज द्वारा आयोजित भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित विवाह समारोह एवं वरिष्ठों का सम्मान समारोह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा ने व्यक्त किए। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथिगणों एवं समाज के वरिष्ठजनों द्वारा भगवान विश्वकर्मा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर माल्यार्पण किया गया। तत्पश्चात्् सम्मान समारोह एवं विवाह समारोह का आयोजन प्रारंभ हुआ। विवाह समारोह में 2 नवदम्पत्तियों सात जन्म साथ रहने की कसम खाई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मंचासीन विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमनारायण विश्वकर्मा, नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा, समाज अध्यक्ष नरेन्द्र विश्वकर्मा, सकल समाज अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव, पार्षद रवि शर्मा, भाजपा जिला मीडिया प्रभारी सुशील संचेती, तेजसिंह राठौर, रूपेश राठौर, कालू भट्ट, तेजपाल मुकाती का समाज के लखन विश्वकर्मा, राजबहादुर विश्वकर्मा, राकेश पांचाल, राकेश विश्वकर्मा द्वारा स्वागत सम्मान किया गया। नपाध्यक्ष प्रतिनिधि श्री मेवाड़ा ने समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा कहा जाता है रावण की सोने की लंका पुष्पक विमान और समस्त देवी-देवताओं के अस्त्र-शस्त्रांे का निर्माण भी विश्कर्मा जी ने ही किया था। हम सब यदि किसी देवी-देवता या महापुरुष की जयंती मनाते है तो उसका सीधा सा सन्देश होता है कि हम सब अपनी एकता अखण्डता बनाये रखे। साथ ही सभी समाजजनों से आग्रह किया कि सामूहिक विवाह समारोह अगले वर्ष दो से 200 की संख्या तक पहुंचे इसके लिए पूरे प्रयास करें।






