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प्रधान संपादक:- श्री दिनेश शर्मा
मुख्य संपादक:- श्री पीयूष शर्मा

आष्टा *आग ने खोल दी नगरपालिका की “तैयारी” की पोल* *दमकल बनी तमाशबीन!* *दमकल गाड़ियों में पानी नहीं, सिस्टम पूरी तरह फेल* *जिम्मेदारों की लापरवाही आई सामने* *लाखों का सामान जलते रहा और जिम्मेदार सोते रहे..* *आखिर किसकी लापरवाही से हुआ इतना बड़ा नुकसान?*

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*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*

 

आष्टा। बीती रात को नगर में हुए भीषण आग हादसे ने नगरपालिका की कथित “आपातकालीन तैयारियों” की सच्चाई को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। एक गेराज में लगी आग नें कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया,लोग मदद के लिए चीखते रहे, फोन घनघनाते रहे… लेकिन नगर पालिका की दमकल व्यवस्था मानो गहरी नींद में सोई रही।

सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक आरोप यह है कि जब दमकल वाहन मौके पर पहुँचे, तब उनमें आग बुझाने के लिए पर्याप्त पानी तक मौजूद नहीं था! यानी जिस व्यवस्था पर हजारों लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही व्यवस्था मौके पर खुद “बेबस” नजर आई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग तेजी से फैल रही थी। गेराज में खड़े वाहन, मशीनें और लाखों का सामान धू-धू कर जलता रहा, लेकिन फायर ब्रिगेड समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकी। लोगों का आरोप है कि अगर दमकल समय पर और पूरी तैयारी के साथ पहुँचती तो नुकसान काफी कम हो सकता था। आज के घटनाक्रम को देखते हुए अब सवाल उठने लगे हैं कि
आखिर दमकल की गाड़ियों में पानी क्यों नहीं था?
क्या नगरपालिका की फायर व्यवस्था सिर्फ फाइलों, मीटिंगों और कागजी दावों तक सीमित है?
क्या करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद नगर की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है?
क्या दमकल वाहनों की नियमित जांच होती भी है या सिर्फ रिकॉर्ड में खानापूर्ति दिखाई जाती है?

आज हुई इस आगजनी की यह घटना सिर्फ एक आग हादसा नहीं, बल्कि नगरपालिका की लापरवाही, अव्यवस्था और गैरजिम्मेदारी का खुला प्रदर्शन बन चुकी है।

अब शहर वासी पूछ रहे हे आखिर क्यो
फायर ब्रिगेड देरी से पहुँची?
दमकल वाहनों में पर्याप्त पानी क्यों नही था?
* जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?
* क्या किसी पर कार्रवाई होगी या फिर मामला दबा दिया जाएगा?

नगरवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि नगरपालिका सिर्फ विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जब असली आपदा सामने आती है तो पूरा सिस्टम धराशायी हो जाता है।
अगर आज गेराज जला है, तो कल कोई घर भी हो सकता है…”

यह हादसा प्रशासन के लिए सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि चेतावनी है।
अगर अभी भी जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में इससे भी बड़ा हादसा नगर को झकझोर सकता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में सिर्फ जांच और आश्वासन का खेल खेलता है…
या सच में उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करेगा जिनकी गंभीर लापरवाही ने लाखों का नुकसान करा दिया।

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