- *अफवाहों की आग में अवसर की रोटी सेंक रहे गैस एजेंसी धारक?*
*आष्टा में गैस संकट की अफवाहों के बीच उपभोक्ताओं से हो रही अवैध वसूली*’
*शहर के बीचों-बीच टंकियों का स्टॉक बना खतरा, जरा सी लापरवाही कभी भी
बन सकती हे बड़ा हादसा*
*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अमेरिका-इजराइल और ईरान के युद्ध की खबरों के बीच देशभर में एलपीजी गैस की किल्लत को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है। लेकिन आष्टा में इन अफवाहों ने एक अलग ही तस्वीर पैदा कर दी है। यहां गैस एजेंसी संचालकों पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने इस माहौल को “आपदा में अवसर” में बदल दिया है और उपभोक्ताओं से खुलेआम अतिरिक्त वसूली की जा रही है।
शहर में गैस सिलेंडर रिफिलिंग को लेकर उपभोक्ताओं को 7 से 8 दिन का इंतजार बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर एजेंसी शोरूम से रोजाना सैकड़ों सिलेंडर सीधे उपभोक्ताओं को दिए जा रहे हैं। सवाल यह है कि जब सप्लाई शोरूम से ही दी जा रही है, तो फिर होम डिलीवरी चार्ज क्यों वसूला जा रहा है?

💰 होम डिलीवरी नहीं, फिर भी 20 रुपए चार्ज क्यों?
जानकारी के अनुसार इंडेन गैस के घरेलू सिलेंडर की कीमत 920 रुपए निर्धारित है, जिसमें 20 रुपए होम डिलीवरी चार्ज शामिल है।
👉 यानी अगर एजेंसी उपभोक्ता के घर सिलेंडर पहुंचाती है तो 920 रुपए वसूलना नियम के अनुसार है।
👉 लेकिन यदि उपभोक्ता स्वयं शोरूम या गोदाम से सिलेंडर ले रहा है, तो उसे केवल 900 रुपए ही देना चाहिए।
लेकिन आष्टा में हालात उलटे नजर आ रहे हैं।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना घर पहुंच सेवा दिए भी एजेंसी संचालक 920 रुपए वसूल रहे हैं।

अब सवाल उठता है –
क्या यह नियमों की खुली अवहेलना नहीं है?
क्या प्रशासन को इन अवैध कारगुज़ारियों की जानकारी नहीं है?
या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनदेखी की जा रही है? ऐसे अनेकों प्रश्न हे जो आज सोचने पर मजबूर कर रहे हे ओर उत्तर की प्रतीक्षा कर रहे हे ।
⚠️ *बीच शहर में एलपीजी टंकियों का भारी स्टॉक, क्या बड़ा खतरा?*
बीते दिनों स्थानीय प्रशासन द्वारा गैस गोदाम की जांच भी की गई थी, लेकिन हालात बताते हैं कि यह कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई। क्योंकि
आज स्थिति यह है कि गैस टंकियों का वितरण गोदाम की बजाय शहर के बीच स्थित शोरूम से ही किया जा रहा है।
यानी बड़ी संख्या में भरे हुए एलपीजी सिलेंडर आवासीय क्षेत्र में ही रखे जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार एलपीजी सिलेंडर अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं और इन्हें घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में स्टॉक करना नियमों के खिलाफ माना जाता है। शहर में टंकिया वितरण करने वाले वाहन भी टंकिया भरे होकर आवासीय क्षेत्र में शोरूम पर ही खड़े हो रहे हे ,
ऐसे में बड़ा सवाल यह है –
क्या शहर के बीचों-बीच “एलपीजी बमों” का जखीरा रखना सुरक्षित है?
यदि किसी कारणवश दुर्घटना हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या जिम्मेदार विभाग इस खतरे से अनजान है?
*कमर्शियल रिफिलिंग बंद, फिर होटल-रेस्टोरेंट में गैस कहां से आ रही?*
सरकार की ओर से फिलहाल कमर्शियल गैस रिफिलिंग पर रोक बताई जा रही है।
लेकिन शहर के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और शादी-ब्याह के बड़े कार्यक्रम बदस्तूर चल रहे हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा होता है —
जब कमर्शियल रिफिलिंग बंद है तो 19 किलो वाले बड़े सिलेंडर कहां से आ रहे हैं?
क्या इन व्यवसायियों के पास वैध बिल और रसीदें मौजूद हैं?
अगर नहीं, तो फिर यह गैस सप्लाई कौन कर रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में आज भी कमर्शियल गैस आसानी से उपलब्ध हो रही है, जबकि आम घरेलू उपभोक्ताओं को 8 दिन इंतजार बताया जा रहा है।
*खाद्य एवं आपूर्ति विभाग पर भी उठे सवाल*
पूरे मामले में अब उंगलियां खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर भी उठ रही हैं।
लोगों का कहना है कि –
अगर शहर में नियमों के विपरीत शोरूम से सिलेंडरो वितरण हो रहा है तो फिर अतिरिक्त अवैध वसूली क्यों?
अगर होम डिलीवरी चार्ज की गलत वसूली हो रही है, ओर अगर कमर्शियल गैस की अवैध सप्लाई बराबर जारी है
तो फिर जिम्मेदार विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
*जांच होगी या यूं ही चलता रहेगा खेल?*
आज आष्टा शहर में गैस एजेंसी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं —
क्या अफवाहों का फायदा उठाकर उपभोक्ताओं से अवैध वसूली की जा रही है?
क्या शहर के बीचों-बीच सिलेंडर स्टॉक कर जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है?
क्या कमर्शियल गैस की सप्लाई पिछले दरवाजे से जारी है?
अब जरूरत है कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और जिला प्रशासन इस पूरे मामले की सूक्ष्म जांच करे और यदि अनियमितताएं पाई जाएं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
क्योंकि अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं लगी, तो कहीं ऐसा न हो कि अफवाहों से पैदा हुई यह स्थिति किसी बड़े हादसे की वजह बन जाए। गैस एजेंसी के
चल रहे इस खतरनाक जानलेवा खेल ओर इस खेल से की जा रही अवैध कमाई को लेकर हमने जब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति अधिकारी रेशमा भामोर से दूरभाष पर संपर्क करना चाहा तो मैडम जी से फोन नहीं उठाया , इस कारण से हम विभाग का पक्ष नहीं रख पा रहे हे,
किंतु अब देखना होगा कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी चल रही इन गंभीर अनियमितताओं पर कब तक रोक लगा पाते हे,? ओर दोषियों के विरुद्ध कब तक कार्यवाही होती हे ?







