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प्रधान संपादक:- श्री दिनेश शर्मा
मुख्य संपादक:- श्री पीयूष शर्मा

आष्टा नगर पालिका की घोर लापरवाही से जैन संतों की गरिमा आहत*, *स्वच्छता दावों की खुल रही पोल*

*नगर पालिका की घोर लापरवाही से जैन संतों की गरिमा आहत*,
*स्वच्छता दावों की खुल रही पोल*

*दिनेश शर्मा आष्टा हलचल*

नगर की सड़कों पर बहता गंदा, बदबूदार पानी अब केवल आम जनता की परेशानी नहीं रहा—अब यह धार्मिक आस्था और संतों की मर्यादा पर भी सीधा हमला बन चुका है। जैन समाज के पूज्य संतों को विहार के दौरान सड़कों पर भरे गंदे पानी से बचते-बचाते निकलना पड़ रहा है।
यह दृश्य किसी एक गली की कहानी नहीं, बल्कि नगर पालिका की लापरवाह और संवेदनहीन कार्यप्रणाली का जीता-जागता सबूत है।

जिस नगर में स्वच्छता अभियान के नाम पर पोस्टर, भाषण और फोटोसेशन होते हुए बाकायदा स्वच्छता के ब्रांड एम्बेसेटर मनोनीत हैं, उसी नगर की सच्चाई यह है कि नालियों की महीनों सफाई नहीं होती हे नतीजा—गंदा पानी सड़कों पर उफनता रहता हे , शहर में उफनती नालियों की दुर्गंध, ओर जगह जगह बे तरतीब बने कचरा अड्डों  में उफनते कचरे की बदबू नगरपालिका की उदासीनता की हकीकत बयां करती है इस वजह से  नगरवासियों  के साथ-साथ संतों को भी अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

*शिकायतें दर्ज, समाधान शून्य*

स्थानीय नागरिकों और जैन समाज के लोगों का कहना है कि इस समस्या को लेकर नगर पालिका को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। न तो नालियों की समुचित सफाई कराई जाती हे, न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति देखने की जहमत उठाता हे।

*आस्था के रास्ते में गंदगी, यह किसकी जिम्मेदारी*?

विहार मार्ग जैसे पवित्र मार्गों पर गंदे पानी का फैलाव यह सवाल खड़ा करता है कि क्या नगर पालिका के लिए आस्था और सम्मान का कोई महत्व नहीं? संतों को जहां शांत, स्वच्छ और सुरक्षित मार्ग मिलना चाहिए, वहां उन्हें गंदगी से जूझना पड़ा—यह पूरे नगर के लिए शर्मनाक है। आज नपा के जिम्मेदारों की उदासीनता को लेकर बड़े सवाल खड़े होते की
• *क्या स्वच्छता अभियान सिर्फ कागजों और सोशल मीडिया तक ही सीमित है?*
*• जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कोई जिम्मेदारी नहीं?*
• *क्या नगर की गरिमा इतनी सस्ती हो चुकी है कि वह नालियों के पानी में बहा दी जाए*?

*जनआक्रोश बढ़ता, कार्रवाई की मांग*

इस तरह की लापरवाही के चलते अब जैन समाज और नगरवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों की स्पष्ट मांग है कि संतो के विहार मार्ग की विशेष सफाई कराई जाए और पूरे नगर में नालियों की नियमित सफाई का स्थायी प्लान लागू किया जाए।

*अब सवाल बिल्कुल साफ है*—
क्या नगर पालिका नींद से जागेगी, या फिर गंदे पानी के साथ-साथ आष्टा की गरिमा भी यूँ ही बहती रहेगी?

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ग्रामीण अंचलों में उत्खनन माफिया बेलगाम जंगल, चरणोई और शासकीय भूमि पर खुलेआम खुदाई—प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल? आष्टा। दिनेश शर्मा आष्टा नगर के आसपास स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में उत्खनन माफिया बेखौफ होकर जंगलों, चरणोई भूमि एवं शासकीय जमीनों पर अवैध उत्खनन कर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब लंबे समय से खुलेआम चल रहा है, फिर भी जिम्मेदार प्रशासनिक अमला मौन साधे हुए है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक प्रभावशाली उत्खनन माफिया बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के निजी जमीन की आड़ लेकर बड़े पैमाने पर खुदाई कर रहा है। इस अवैध उत्खनन में न केवल संबंधित किसान की भूमि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि आसपास की शासकीय भूमि और चरणोई जमीन भी बेरहमी से खोद डाली गई है। सूत्र यह भी बताते हैं कि गोपालपुर–चिन्नीथा क्षेत्र में एक उत्खनन माफिया द्वारा भारी स्तर पर अवैध खुदाई की जा रही है। खासकर गोपालपुर के बड्ढले क्षेत्र में चल रही खुदाई और मिट्टी/मोरम के परिवहन की कोई वैधानिक अनुमति अब तक जारी नहीं हुई है, इसके बावजूद प्रतिदिन मशीनों से खुदाई और वाहनों के जरिए परिवहन जारी है। इस बात की गवाही अवैध खनन से माफियाओ द्वारा सरकारी जमीनों को बड़े बड़े तालाब नुमा आकार में कर दी है । बताया जा रहा है कि संबंधित माफिया ने किसान से निजी आर्थिक समझौते के आधार पर उसकी जमीन का उपयोग करते हुए, पास की शासकीय बड्ढले भूमि को भी खोदकर तालाब का रूप दे दिया है। यह सीधे-सीधे शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और नियमों की खुली अवहेलना का मामला है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि स्थानीय प्रशासन को इस पूरे अवैध उत्खनन की जानकारी न हो, ऐसा मानना मुश्किल है? इसके बावजूद न तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही मशीनें जब्त की गई हैं। प्रशासन की यही उदासीनता उत्खनन माफियाओं का हौसला बढ़ा रही है। जानकारो का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लगाई गई, तो पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने के साथ-साथ सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होता रहेगा। जिला खनिज प्रशासन ,और स्थानीय प्रशासन को चाहिए की मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और अवैध उत्खनन रोक लगावे ।

आष्टा | नलों में ज़हर! दूषित पानी से जनता की सेहत से खुला खिलवाड़, नपा बे परवाह । आष्टा शहर में इन दिनों नलों से पानी नहीं, बीमारियाँ बह रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की आँखों पर जैसे लापरवाही की पट्टी बंधी हुई है।

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