
आष्टा। नगर के बुधवारा रोड से लगे हाथीखाना क्षेत्र में अव्यवस्थित तरीके से खड़े किए जा रहे चार पहिया वाहन अब स्थानीय रहवासियों के लिए भारी मुसीबत बनते जा रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अंदरूनी रास्तों पर पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि एक ओर वर्षों से मकानों के आगे अनियंत्रित अतिक्रमण कर रास्तों को संकरा किया गया, वहीं दूसरी ओर अब उन्हीं तंग गलियों में वाहन इस अंदाज में खड़े किए जा रहे हैं कि लोगों की आवाजाही तक प्रभावित हो रही है।
स्थिति ऐसी बन गई है कि कई जगहों पर रास्ता कम और पार्किंग ज्यादा नजर आती है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक परेशानी झेल रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि हाथीखाना पहले भी ऐसे ही वाहन विवाद का गवाह बन चुका है। बीते समय में बेतरतीब पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा था कि आपसी संघर्ष में एक व्यक्ति की जान तक चली गई थी। और वह व्यक्ति जिसके हाथो हत्या हुई थी वह आज भी जेल में सजा काट रहा है ।
इस घटना के बाद कुछ समय तक व्यवस्था सुधरी जरूर, लेकिन अब फिर हालात पुराने ढर्रे पर लौटते दिखाई दे रहे हैं। घरों के सामने और संकरे रास्तों में बेधड़क खड़े वाहन आम नागरिकों के लिए रोज नई परेशानी खड़ी कर रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि —
क्या प्रशासन और नगर पालिका फिर किसी बड़े विवाद या हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
या फिर समय रहते अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर सख्त कार्रवाई कर नागरिकों को राहत दी जाएगी?
“रास्ता जनता के चलने के लिए है या बेतरतीब पार्किंग के लिए?”
हाथीखाना क्षेत्र के लोग अब यही सवाल उठा रहे हैं।
वैसे भी लोगो का यहाँ तक कहना है की इन खड़े वाहनो के रजिस्ट्रेशन कागजातों की सूक्ष्म जाँच पड़ताल की जावे तो हो सकता ही कई वाहनो के कागजात ही नहीं मिले ।
क्योकि कुछ वाहन ऐसे भी हे जो वर्षों से बेतरतीब खड़े हुए हे,और रहवासी लोग हटाने का कहते ही तो वाहन मालिक झगड़े पर उतारू रहते हे ।






