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प्रधान संपादक:- श्री दिनेश शर्मा
मुख्य संपादक:- श्री पीयूष शर्मा

आष्टा गिट्टी क्रेशर मशीन संचालकों ने सैकड़ों एकड़ जमीन सरकारी ही खोद डाली, ओर करोड़ों के बारे न्यारे कर लिए,साथ ही राजस्व रॉयल्टी की चोरी कर सरकार को भी लगा रहे हे चुना ।

*आष्टा गिट्टी क्रेशर मशीन संचालकों ने सैकड़ों एकड़ जमीन सरकारी ही खोद डाली, ओर करोड़ों के बारे न्यारे कर लिए,साथ ही राजस्व रॉयल्टी की चोरी कर सरकार को भी लगा रहे हे चुना* ।

*दिनेश शर्मा आष्टा*

क्रेशर मशीनों के संचालकों को अगर भू माफिया भी कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ।क्योंकि आज आष्टा नगरीय क्षेत्र के आसपास लगे गांवों के रास्तों पर लगी अनेकों क्रेशर मशीनों संचालित हो रही हे, इन क्रेशर मशीनों के लिए गिट्टी बनाने के उपयोगी पत्थरों के लिए शासन से विधिवत नियमानुसार एक निश्चित सीमांकित भूमि आवंटित होती हे , किंतु आलम यह हे कि गिट्टी मशीनों को कितनी कितनी भूमि आवंटित हुई हे किसी को नहीं मालूम, ओर नहीं मोकाये स्थल पर  यह प्रदर्शित हे, ऐसे क्या माना जावे कि मशीन संचालकों को उनकी मशीन के आसपास की पूरी सरकारी जमीन ही खुदाई के लिए आवंटित करी गई हे ?
क्योंकि मशीनों के आसपास के भूखंड जो अब बड़े बड़े तालाब ओर खाई का रूप ले चुके हे इन्हें देखकर तो अंदाजा यही लग रहा हे ।
ओर अगर क्रेशर मशीनों के संचालक अपनी आवंटित भूमि के अलावा अगर गलत तरीके से अन्य सरकारी भूखंडों पर खुदाई कर अपना व्यापार कर रहे हे तो फिर जिले ने बैठे माइनिंग निरीक्षक ओर उसके विभाग के क्या मायने?
आपको बता दे इंदौर भोपाल हाइवे से लगे उमरपुर रोड पर लगभग 5- 6 मशीन धड़ल्ले से चल रही हे , साथ ही मशीनों के आसपास की जमीन के अलावा उमरपुर, टिपाखेड़ीरोड के दोनों तरफ जिस तरह से गहरी सैकड़ों एकड़ जमीन खाई ओर तालाब में तब्दील हो गई , उसे देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सारा खेल मशीन संचालक पूरी दमदारी के साथ माइनिंग विभाग ओर उसके जिम्मेदार अधिकारी की शह पर  खेल रहे हे।
बड़े आश्चर्य की बात हे कि इन माफियाओं ने उमरपुर रोड पर बना गंगा मां का मंदिर वाला हिस्सा भी नहीं छोड़ा, उसेभी पूरा खोद डाला ।
आज क्रेशर मशीन संचालक एक बड़े भूमाफिया के रूप में अपनी पहचान बना चुके है।
हैरत की बात हे कि क्रेशर मशीन संचालकों को आवंटित खदान की भूमि कहां हे ओर आज खदान ठेकेदार कहां की जमीन खोद रहे हे ।
हालात यह हे कि सड़क के दोनों तरफ बन चुके बड़े बड़े तालाबों में जब बारिश का पानी भर जाता हे तो स्वाभाविक हे खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता हे। कभी भी की बड़ी घटना घट सकती हे।
जिस तरह का यह खेल वर्षों से चल रहा हे उसे देखकर ओर समझ कर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता हे कि यह सारा का सारा अवैध उत्खनन का व्यापार पूरी तरह से राजनेतिक संरक्षण में चल रहा हे , वरना क्या मजाल कि कोई व्यक्ति बड़े भूमाफिया बन कर सरकार की बेशकीमती जमीन को अवैध तरीके से खोद कर करोड़ों रुपए कमा लेवे और जिम्मेदार विभाग को पता ही न चले?
हकीकत का नजारा स्वयं बता रहा हे कि यह उत्खनन माइनिंग निरीक्षक के मिलीभगत से ही हुआ होगा ?
चूंकि मामला अवैध रूप से सरकार की जमीन खोद कर कमाए करोड़ों रुपयों का हे तो क्या जिम्मेदार विभाग विधिवत आवंटित भूमि का सीमांकन कर बाकी बची भूमि से की गई खुदाई का आंकलन कर वसूली करेगा ?
अगर ऐसा नही होता हे तो स्वाभाविक हे जो शंकाएं कुशंकाएं जागरूक लोगों के दिल दिमाग में उपजी हे वह विश्वास में बदल जावेगी ।

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